Bihar Board Class 10 Political Science Chapter 3 Solutions,
बिहार बोर्ड कक्षा 10 के छात्रों के लिए राजनीति विज्ञान के अध्याय 3 – "लोकतंत्र में प्रतिस्पर्धा एवं संघर्ष" का समाधान यहाँ निःशुल्क उपलब्ध है।
यह अध्याय भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में राजनीतिक प्रक्रिया की गहराई को समझने में मदद करता है। इसमें यह बताया गया है कि लोकतंत्र में विभिन्न विचारधाराओं, हितों और संगठनों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और संघर्ष कैसे होते हैं।
आप जानेंगे कि किस तरह राजनीतिक दल, सामाजिक संगठन और हित समूह अपने विचारों और मांगों को समाज के सामने रखते हैं और जनसमर्थन प्राप्त करने की कोशिश करते हैं। यह अध्याय यह भी स्पष्ट करता है कि लोकतंत्र केवल चुनावों तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह निरंतर संवाद, असहमति, और भागीदारी से चलता है।

प्रश्न 1. वर्ष 1975 ई. भारतीय राजनीति में किसलिए जाना जाता है ?
(क) इस वर्ष आम चुनाव हुए थे
(ख) श्रीमती इंदिरा गाँधी प्रधानमंत्री बनी थी
(ग) देश के अंदर आपातकाल लागू हुआ था
(घ) जनता पार्टी की सरकार बनी थी
उत्तर- (ग)
प्रश्न 2. भारतीय लोकतंत्र में सत्ता के विरुद्ध जन आक्रोश किस दशक से प्रारंभ हुआ ?
(क) 1960 के दशक से
(ख) 1970 के दशक से
(ग). 1980 के दशक से
(घ) 1990 के दशक से
उत्तर- (ख)
प्रश्न 3. बिहार में सम्पूर्ण क्रांति का नेतृत्व निम्नलिखित में से किसने किया?
(क) मोरारजी देसाई
(ख) नीतीश कुमार
(ग) इंदिरा गाँधी
(घ) जयप्रकाश नारायण
उत्तर- (घ)
प्रश्न 4. भारत में हुए 1977 ई. के आम चुनाव में किस पार्टी को बहुमत मिला था?
(क) काँग्रेस पार्टी को
(ख) जनता पार्टी को
(ग) कम्युनिस्ट पार्टी को
(घ) किसी पार्टी को भी नहीं
उत्तर- (ख)
प्रश्न 5. ‘चिपको आन्दोलन’ निम्नलिखित में से किससे संबंधित नहीं है ?
(क) अंगूर के पेड़ काटने की अनुमति से
(ख) आर्थिक शोषण से मुक्ति से
(ग) शराबखोरी के विरुद्ध आवाज से
(घ) कांग्रेस पार्टी के विरोध से
उत्तर- (क)
प्रश्न 6. ‘दलित पैंथर्स’ के कार्यक्रम में निम्नलिखित में कौन संबंधित नहीं हैं ?
(क) जाति प्रथा का उन्मूलन
(ख) दलित सेना का गठन
(ग) भूमिहीन गरीब किसान की उन्नति
(घ) औद्योगिक मजदूरों का शोषण से मुक्ति
उत्तर- (ख)
प्रश्न 7. निम्नलिखित में से कौन ‘भारतीय किसान यूनियन’ के प्रमुख नेता थे?
(क) मोरारजी देसाई
(ख) जैयप्रकाश नारायण
(ग) महेन्द्र सिंह टिकैत
(घ) चौधरी चरण सिंह
उत्तर- (ग)
प्रश्न 8. ‘ताड़ी-विरोधी आंदोलन’ निम्नलखित में से किस प्रांत में शुरू किया गया?
(क) बिहार
(ख) उत्तर प्रदेश
(ग) आंध्र प्रदेश
(घ) तमिलनाडु
उत्तर- (ग)
प्रश्न 9. ‘नर्मदा घाटी परियोजना’ किन राज्यों से संबंधित है ?
(क) बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश
(ख) तमिलनाडु, करेल, कर्नाटक
(ग) पं. बंगाल, उत्तर प्रदेश, पंजाब
(घ) गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश
उत्तर- (घ)
प्रश्न 10. “सूचना के अधिकार आंदोलन’ की शुरूआत कहाँ से हुई ?
(क) राजस्थान
(ख) दिल्ली
(ग) तमिलनाडु
(घ) बिहार
उत्तर- (क)
प्रश्न 11. ‘सूचना का अधिकार’ संबंधी कानून कब बना?
(क) 2004 ई. में
(ख) 2005 ई. में
(ग) 2006 ई० में
(घ) 2007 ई. में
उत्तर- (ख)
प्रश्न 12. नेपाल में सप्तदलीय गठबंधन का मुख्य उद्देश्य क्या है ?
(क) राजा को देश छोड़ने पर मजबूर करना
(ख) लोकतंत्र की स्थापना करना
(ग) भारत-नेपाल के बीच संबंधों को और बेहतर बनाना
(घ) सर्वदलीय सरकार की स्थापना करना
उत्तर- (ख)
प्रश्न 13. बोलिविया में जनसंघर्ष का मुख्य कारण था
(क) पानी की कीमत में वृद्धि
(ख) खाद्यान्न की कीमत में वृद्धि
(ग) पेट्रोल की कीमत में वृद्धि ।
(घ) जीवन रक्षक दवाओं की कीमत में वृद्धि
उत्तर- (क)
प्रश्न 14. श्रीलंका कब आजाद हुआ ?
(क) 1947 में
(ख) 1948 में
(ग) 1949 में
(घ) 1950 में
उत्तर- (ख) 4 February 1948
प्रश्न 15. राजनीतिक दल का आशय है
(क) अफसरों के समूह से
(ख) सेनाओं के समूह से
(ग) व्यक्तियों के समूह से
(घ) किसानों के समूह से
उत्तर- (ग)
प्रश्न 16. निम्नलिखित में से कौन-सा प्रमुख उद्देश्य प्रायः सभी राजनीतिक दलों का होता है ?
(क) सत्ता प्राप्त करना
(ख) सरकारी पदा का प्राप्त करना
(ग) चुनाव लड़ना
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर- (क)
प्रश्न 17. राजनीतिक दलों की नींव सर्वप्रथम किस देश में पड़ी ?
(क) ब्रिटेन
(ख) भारत में
(ग) फ्रांस में
(घ) संयुक्त राज्य अमेरिका में
उत्तर- (क)
प्रश्न 18. निम्नलिखित में किसे लोकतंत्र का प्राण माना जाता है ?
(क) सरकार को
(ख) न्यायपालिका को
(ग) संविधान को
(घ) राजनीतिक दल को
उत्तर- (घ)
प्रश्न 19. निम्नलिखित में कौन-सा कार्य राजनीतिक दल नहीं करता है?
(क) चुनाव लड़ना
(ख) सरकार की आलोचना करना
(ग) प्राकृतिक आपदा में राहत से
(घ) अफसरों की बहाली संबंधित
उत्तर- (घ)
प्रश्न 20. निम्नलिखित में कौन-सा विचार लोकतंत्र में राजनीतिक दलों से मेल नहीं खाता है ?
(क) राजनीतिक दल लोगों की भावनाओं एवं विचारों को जोड़कर सरकार के सामने रखता
(ख) राजनीतिक दल देश में एकता और अखंडता स्थापित करने का साधन है।
(ग) देश के विकास के लिए सरकारी नीतियों में राजनीतिक दल बाधा उत्पन्न करता है।
(घ) राजनीतिक दल विभिन्न वर्गों, जातियों, धर्मों की समस्याएं सरकार तक पहुंचाता है।
उत्तर- (ग)
प्रश्न 21. किस देश में बहुदलीय व्यवस्था नहीं है ?
(क) पाकिस्तान
(ख) भारत
(ग) बांग्लादेश
(घ) ब्रिटेन
उत्तर- (घ)
प्रश्न 22. गठबंधन की सरकार बनाने की संभावना किस प्रकार की दलीय व्यवस्था में रहती है ?
(क) एकदलीय व्यवस्था
(ख) द्विदलीय व्यवस्था
(ग) बहुदलीय व्यवस्था
(घ) उपर्युक्त में किसी से भी नहीं
उत्तर- (ग)
प्रश्न 23. किसी भी देश में राजनीतिक स्थायित्व के लिए निम्नलिखित में क्या नहीं आवश्यक
(क) सभी दलों द्वारा सरकार को रचनात्मक सहयोग देना
(ख) किसी भी ढंग से सरकार को अपदस्थ करना
(ग) निर्णय-प्रक्रिया में सरकार द्वारा सबकी सहमति लेना
(घ) सरकार द्वारा विरोधी दलों में नजरबंद करना
उत्तर- (ख)
प्रश्न 24. निम्नलिखित में कौन-सी चुनौती राजनीतिक दलों को नहीं है ?
(क) राजनीतिक दलों के भीतर समय पर सांगठनिक चुनाव नहीं होना
(ख) राजनीतिक दलों में युवाओं और महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिलना
(ग) राजनीतिक दलों द्वारा जनता की समस्याओं को सरकार के पास रखना
(घ) विपरीत सिद्धांत रखनेवाले राजनीतिक दलों से गठबंधन करना
उत्तर- (ख)
प्रश्न 25. दल-बदल कानून निम्नलिखित में से किस पर लागू होता है ?
(क) सांसदों एवं विधायकों पर
(ख) राष्ट्रपति पर
(ग) उपराष्ट्रपति पर
(घ) उपर्युक्त में सभी पर
उत्तर- (क)
प्रश्न 26. राजनीतिक दलों की मान्यता और उसका चिह्न किसके द्वारा प्रदान किया जाता है ?
(क) राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा
(ख) प्रधानमंत्री सचिवालय द्वारा
(ग) निर्वाचन आयोग द्वारा
(घ) संसद द्वारा
उत्तर- (ग)
प्रश्न 27. निम्नलिखित में कौन राष्ट्रीय दल नहीं है ?
(क) राष्ट्रीय जनता दल
(ख) बहुजन समाज पार्टी
(ग) लोक जनशक्ति पार्टी
(घ) भारतीय जनता पार्टी
उत्तर- (ग)
प्रश्न 28. जनता दल (यूनाइटेड) पार्टी का गठन कब हुआ?
(क) 1992 में
(ख) 2003 में
(ग) 2000 में
(घ) 2004 में
उत्तर- (ख) 30 October 2003
उत्तर-
| सूची-I | सूची -II |
| 1. समाजवादी पार्टी | साइकिल |
| 2. राजद | लालटेन |
| 3. लोजपा | बंगला |
| 4. जेडीयू | तीर |
उत्तर-
| सूची-I | सूची-Il |
| 1. कांग्रेसी | य. पी. ए. |
| 2. भारतीय जनता पार्टी | एनडीए |
| 3. कम्युनिस्ट पार्टी | राष्ट्रीय दल |
| 4. झारखण्ड मुक्तिमोर्चा | क्षेत्रीय पार्टी |
प्रश्न 1. बिहार में हुए ‘छात्र आंदोलन’ के प्रमुख कारण थे?
उत्तर- बिहार में हुए ‘छात्र आंदोलन’ के प्रमुख कारण थे — राज्य में बढ़ता भ्रष्टाचार, सरकारी कामकाज में लापरवाही, बेरोज़गारी की गंभीर समस्या, महँगाई में तेज़ वृद्धि और शिक्षा व्यवस्था में गिरावट। इन हालातों से युवाओं में असंतोष बढ़ा, जिसने आंदोलन का रूप ले लिया।
प्रश्न 2. ‘चिपको आंदोलन’ के मुख्य उद्देश्य क्या थे?
उत्तर- ‘चिपको आंदोलन’ का मुख्य उद्देश्य वनों को व्यावसायिक कटाई से बचाना, पर्यावरण की रक्षा करना और उन ग्रामीण समुदायों की आजीविका सुरक्षित रखना था जो जंगलों पर निर्भर थे। इसका लक्ष्य प्राकृतिक संसाधनों का सतत उपयोग बढ़ावा देना और पेड़ों के पर्यावरणीय महत्व के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाना भी था।
प्रश्न 3. स्वतंत्र राजनीतिक संगठन कौन होता है?
उत्तर- स्वतंत्र राजनीतिक संगठन वह समूह या संस्था होती है जो किसी बड़े दल या सरकारी नियंत्रण से मुक्त होकर कार्य करती है। इसका उद्देश्य अपनी विचारधारा, नीतियों और लक्ष्यों के आधार पर जनता के बीच काम करना और राजनीतिक गतिविधियाँ संचालित करना होता है।
प्रश्न 4. भारतीय किसान यूनियन की मुख्य मांगें क्या थीं?
उत्तर- भारतीय किसान यूनियन की मुख्य मांगें थीं — किसानों को उनकी फसलों का उचित और लाभकारी मूल्य मिलना, कृषि ऋणों पर ब्याज माफ़ करना, बिजली और सिंचाई सुविधाएँ सस्ती व सुगम बनाना, तथा कृषि उपज पर उचित समर्थन मूल्य तय करके किसानों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना।
प्रश्न 5. सूचना के अधिकार आंदोलन के मुख्य उद्देश्य क्या थे?
उत्तर- सूचना के अधिकार आंदोलन का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों को सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही का अधिकार दिलाना था। इसके तहत लोग सरकारी नीतियों, निर्णयों और खर्चों से जुड़ी सही जानकारी प्राप्त कर सकें, ताकि भ्रष्टाचार कम हो और प्रशासन जनता के प्रति अधिक जिम्मेदार बने।
प्रश्न 6. राजनीतिक दल की परिभाषा दें।
उत्तर- राजनीतिक दल वह संगठित समूह होता है जो समान विचारधारा और नीतियों के आधार पर शासन चलाने या उस पर प्रभाव डालने के उद्देश्य से कार्य करता है। इसका मुख्य लक्ष्य चुनावों में भाग लेकर सत्ता प्राप्त करना और अपनी नीतियों के अनुसार देश या राज्य का संचालन करना होता है।
प्रश्न 7. किस आधार पर आप कह सकते हैं कि राजनीतिक दल जनता एवं सरकारों के बीच कड़ी का काम करता है?
उत्तर- हम कह सकते हैं कि राजनीतिक दल जनता और सरकार के बीच कड़ी का काम करता है क्योंकि वह जनता की समस्याओं, जरूरतों और विचारों को नीतियों और कानूनों के रूप में सरकार तक पहुँचाता है। साथ ही, सरकार के फैसलों और योजनाओं की जानकारी जनता तक पहुँचाकर दोनों के बीच संवाद और विश्वास बनाए रखता है।
प्रश्न 8. दल-बदल कानून क्या है?
उत्तर- दल-बदल कानून वह प्रावधान है जो चुने गए प्रतिनिधियों को अपने निर्वाचित दल को छोड़कर किसी अन्य दल में शामिल होने या दल बदलने से रोकता है। इसका उद्देश्य राजनीतिक स्थिरता बनाए रखना और जनादेश के साथ विश्वासघात को रोकना है।
प्रश्न 9. राष्ट्रीय राजनीतिक दल किसे कहते हैं?
उत्तर- राष्ट्रीय राजनीतिक दल वह दल होता है जिसे भारत निर्वाचन आयोग द्वारा तय मानकों के आधार पर पूरे देश में मान्यता प्राप्त हो। ऐसे दल का प्रभाव और कार्यक्षेत्र कई राज्यों में होता है, और यह राष्ट्रीय स्तर पर चुनाव लड़कर नीतियां व कार्यक्रम लागू करने का प्रयास करता है।
प्रश्न 1. जनसंघर्ष से भी लोकतंत्र मजबूत होता है। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? अपने पक्ष में उत्तर दें।
उत्तर- हाँ, मैं इस कथन से पूरी तरह सहमत हूँ कि जनसंघर्ष से भी लोकतंत्र मजबूत होता है। लोकतंत्र की असली ताकत जनता की सक्रिय भागीदारी में निहित है। जब नागरिक अपने अधिकारों, स्वतंत्रता और न्याय के लिए संगठित होकर संघर्ष करते हैं, तो यह सत्ता को याद दिलाता है कि उसका अस्तित्व जनता की सेवा के लिए है, न कि अपने स्वार्थ के लिए।
जनसंघर्ष सरकार को जनता की आवाज़ सुनने, गलत नीतियों में सुधार करने और पारदर्शिता व जवाबदेही बनाए रखने के लिए मजबूर करता है। यह प्रक्रिया न केवल अन्याय और भ्रष्टाचार को चुनौती देती है, बल्कि जनहित में निर्णय लेने की संस्कृति को भी प्रोत्साहित करती है।
इतिहास गवाह है कि भारत में स्वतंत्रता संग्राम, चिपको आंदोलन, सूचना के अधिकार आंदोलन और किसान आंदोलनों जैसे जनसंघर्षों ने समाज और शासन में सकारात्मक बदलाव लाए हैं। ऐसे संघर्ष लोकतंत्र के भीतर सुधार और विकास के रास्ते खोलते हैं।
इसलिए कहा जा सकता है कि जनसंघर्ष केवल असंतोष का प्रतीक नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए ऊर्जा और सुधार का स्रोत है, जो उसे और अधिक जीवंत, मजबूत और जनमुखी बनाता है।
प्रश्न 2. किस आधार पर आप कह सकते हैं कि बिहार से शुरू हुआ ‘छात्र आंदोलन’ का स्वरूप राष्ट्रीय हो गया?
उत्तर- बिहार से शुरू हुआ ‘छात्र आंदोलन’ का स्वरूप राष्ट्रीय इसलिए हो गया क्योंकि इसकी शुरुआत भले ही राज्य के मुद्दों से हुई थी, लेकिन इसके कारण, नेतृत्व और प्रभाव ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
शुरुआत में यह आंदोलन बिहार में बढ़ते भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी, महँगाई और शिक्षा व्यवस्था की अव्यवस्था के खिलाफ था। 1974 में जयप्रकाश नारायण (जेपी) के नेतृत्व में यह आंदोलन एक बड़े सामाजिक और राजनीतिक अभियान में बदल गया। जेपी ने इसे केवल छात्रों या बिहार तक सीमित नहीं रखा, बल्कि देशभर में फैलाकर इसे “संपूर्ण क्रांति” का नाम दिया, जिसमें भ्रष्टाचार उन्मूलन, सामाजिक न्याय, पारदर्शी शासन और जनसरोकार की नीतियों की मांग शामिल थी।
इस आंदोलन में देश के विभिन्न राज्यों के छात्र संगठनों, मजदूर यूनियनों, किसानों और आम नागरिकों ने सक्रिय भागीदारी की। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भी रैलियां, धरने और प्रदर्शन हुए। मीडिया ने इसकी ख़बरें लगातार प्रसारित कीं, जिससे यह राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया।
आख़िरकार, इस आंदोलन का प्रभाव इतना व्यापक हुआ कि इसने केंद्र सरकार की नीतियों को चुनौती दी और आपातकाल की घोषणा तक की पृष्ठभूमि तैयार कर दी। इस तरह स्पष्ट है कि बिहार से शुरू हुआ छात्र आंदोलन केवल एक राज्य तक सीमित न रहकर पूरे देश के राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य को प्रभावित करने वाला राष्ट्रीय आंदोलन बन गया।
प्रश्न 3. निम्नलिखित वक्तव्यों को पढ़ें और अपने पक्ष में उत्तर दें
(क) क्षेत्रीय भावना लोकतंत्र को मजबूत करती है।
उत्तर- हाँ, क्षेत्रीय भावना लोकतंत्र को मजबूत करती है क्योंकि यह किसी क्षेत्र की संस्कृति, भाषा, परंपरा और स्थानीय जरूरतों को पहचान देती है। जब लोग अपनी क्षेत्रीय पहचान और अधिकारों के प्रति जागरूक होते हैं, तो वे शासन में अधिक सक्रिय भागीदारी करते हैं। इससे न केवल स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए दबाव बनता है, बल्कि राष्ट्रीय नीतियों में भी विविधता और संतुलन आता है। इस तरह क्षेत्रीय भावना, अगर सकारात्मक और समावेशी हो, तो लोकतंत्र को अधिक प्रतिनिधि और जीवंत बनाती है।
(ख) दबाव समूह स्वार्थी तत्वों का समूह है। इसलिए इसे समाप्त कर देना चाहिए।
उत्तर- मैं इस विचार से पूरी तरह सहमत नहीं हूँ, क्योंकि दबाव समूह केवल स्वार्थी तत्वों का समूह नहीं होते। ये ऐसे संगठित समूह होते हैं जो किसी विशेष वर्ग, पेशे या समुदाय के हितों की रक्षा और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए काम करते हैं। हाँ, कुछ मामलों में ये अपने निजी हितों को प्राथमिकता दे सकते हैं, लेकिन कई बार ये सामाजिक न्याय, पर्यावरण संरक्षण, श्रमिक अधिकार और उपभोक्ता हितों जैसे जनकल्याण के मुद्दों पर भी दबाव डालते हैं। इसलिए इन्हें समाप्त करने के बजाय इनके कामकाज को पारदर्शी और जवाबदेह बनाना लोकतंत्र के लिए अधिक लाभदायक है।
(ग) जनसंघर्ष लोकतंत्र का विरोधी है।
उत्तर- मैं इस कथन से असहमत हूँ क्योंकि जनसंघर्ष लोकतंत्र का विरोधी नहीं, बल्कि उसका आवश्यक हिस्सा है। लोकतंत्र में जनता को अपनी समस्याएँ, असंतोष और मांगें खुलकर रखने का अधिकार होता है। जब सरकार या संस्थाएँ जनता की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरतीं, तो जनसंघर्ष उनके सुधार और जवाबदेही के लिए दबाव बनाता है। यह अन्याय, भ्रष्टाचार और गलत नीतियों को चुनौती देकर लोकतांत्रिक व्यवस्था को और मजबूत करता है। इसलिए जनसंघर्ष लोकतंत्र का दुश्मन नहीं, बल्कि उसका रक्षक और सशक्तिकरण का साधन है।
(घ) भारत के लोकतंत्र के लिए हुए आंदोलन में महिलाओं की भूमिका नगण्य है।
उत्तर- मैं इस कथन से पूरी तरह असहमत हूँ, क्योंकि भारत के लोकतंत्र के लिए हुए आंदोलनों में महिलाओं की भूमिका कभी नगण्य नहीं रही। स्वतंत्रता संग्राम से लेकर चिपको आंदोलन, नर्मदा बचाओ आंदोलन, अन्ना आंदोलन और हाल के किसान आंदोलनों तक, महिलाओं ने अग्रिम पंक्ति में रहकर नेतृत्व किया है। उन्होंने न केवल रैलियों, धरनों और जनजागरण में सक्रिय भागीदारी की, बल्कि संगठन, प्रचार और आंदोलन की निरंतरता में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। महिलाओं की यह सक्रियता लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने और समाज में समानता व न्याय की भावना को आगे बढ़ाने में बेहद अहम रही है।
प्रश्न 4. राजनीतिक दल को लोकतंत्र का प्राण क्यों कहा जाता है?
उत्तर- राजनीतिक दल को लोकतंत्र का प्राण इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये जनता और सरकार के बीच सेतु का काम करते हैं। लोकतंत्र में राजनीतिक दल जनता की इच्छाओं, जरूरतों और समस्याओं को नीतियों और कानूनों में बदलने का माध्यम बनते हैं। वे चुनावों के जरिए जनता को प्रतिनिधि चुनने का अवसर देते हैं और सरकार चलाने के लिए स्पष्ट दिशा और कार्यक्रम प्रदान करते हैं। बिना राजनीतिक दलों के लोकतांत्रिक प्रक्रिया निष्प्राण और बिखरी हुई हो जाएगी, क्योंकि यही दल जनता की आवाज़ को संगठित रूप में सत्ता तक पहुँचाकर लोकतंत्र को जीवंत और प्रभावी बनाए रखते हैं।
प्रश्न 5. राजनीतिक दल राष्ट्रीय विकास में किस प्रकार योगदान करते हैं?
उत्तर- राजनीतिक दल राष्ट्रीय विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, क्योंकि वे न केवल शासन व्यवस्था को दिशा देते हैं बल्कि देश की नीतियों और योजनाओं के निर्माण में भी निर्णायक योगदान करते हैं। लोकतंत्र में राजनीतिक दल जनता की समस्याओं और आकांक्षाओं को समझकर उन्हें विकास नीतियों में शामिल करते हैं, जिससे समाज के सभी वर्गों को समान अवसर मिल सके।
सबसे पहले, राजनीतिक दल चुनावी प्रक्रिया के माध्यम से योग्य प्रतिनिधियों का चयन सुनिश्चित करते हैं, जो संसद और विधानसभा में देशहित में कानून बना सकें। ये कानून शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, कृषि, विज्ञान और तकनीक जैसे क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा देते हैं।
दूसरे, राजनीतिक दल राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सामंजस्य बनाए रखने के लिए कार्य करते हैं। वे अलग-अलग क्षेत्रों, भाषाओं और संस्कृतियों को एक साझा मंच पर लाकर विकास योजनाओं में संतुलन स्थापित करते हैं।
तीसरे, राजनीतिक दल विदेश नीति, आर्थिक सुधार, पर्यावरण संरक्षण और बुनियादी ढांचे के विकास में ठोस पहल करते हैं। वे जनकल्याणकारी योजनाओं जैसे रोजगार सृजन, गरीबी उन्मूलन, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास को प्राथमिकता देकर समाज की प्रगति सुनिश्चित करते हैं।
अंततः, राजनीतिक दल जनता और सरकार के बीच संवाद बनाए रखते हैं, जिससे नीतियों की पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहती है। इस तरह वे केवल सत्ता चलाने का काम नहीं करते, बल्कि राष्ट्र को आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से मजबूत बनाने में सक्रिय योगदान देते हैं, जो राष्ट्रीय विकास की रीढ़ है।
प्रश्न 6: राजनीतिक दलों के प्रमुख कार्य बताएँ।
उत्तर- राजनीतिक दल लोकतांत्रिक व्यवस्था के मूल स्तंभ हैं, और उनके प्रमुख कार्य कई आयामों में फैले होते हैं। ये कार्य न केवल चुनाव जीतने तक सीमित हैं, बल्कि शासन, नीतिनिर्माण, सामाजिक एकता और जनता की भागीदारी को सुनिश्चित करने तक विस्तृत हैं।
1. जनता और सरकार के बीच सेतु का कार्य
राजनीतिक दल जनता की समस्याओं, आकांक्षाओं और विचारों को सरकार तक पहुँचाते हैं। वे नीतियों और कार्यक्रमों के माध्यम से इन मांगों को व्यवहारिक रूप देते हैं, जिससे शासन अधिक जनकेंद्रित बनता है।
2. चुनावी प्रक्रिया का संचालन
दल उम्मीदवारों का चयन करते हैं, चुनाव प्रचार चलाते हैं और अपने विचारों व नीतियों को जनता तक पहुँचाते हैं। इससे मतदाता विभिन्न विकल्पों में से अपने प्रतिनिधि चुन पाते हैं।
3. नीतियों और कानूनों का निर्माण
राजनीतिक दल अपने घोषणापत्र के आधार पर संसद और विधानसभाओं में कानून बनाने और नीतियाँ तय करने में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। ये नीतियाँ शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, कृषि, रोजगार आदि क्षेत्रों में विकास को गति देती हैं।
4. सरकार का गठन और संचालन
चुनाव जीतने वाले दल या दलों का गठबंधन सरकार बनाता है। सत्ता में रहते हुए राजनीतिक दल शासन की दिशा तय करते हैं, प्रशासनिक फैसले लेते हैं और जनकल्याणकारी योजनाएँ लागू करते हैं।
5. विपक्ष की भूमिका निभाना
जो दल सत्ता में नहीं होते, वे विपक्ष में रहकर सरकार के कामकाज की निगरानी करते हैं, गलत नीतियों का विरोध करते हैं और जनता के हितों की रक्षा के लिए वैकल्पिक सुझाव देते हैं।
6. सामाजिक एकता और राजनीतिक शिक्षा
राजनीतिक दल विभिन्न क्षेत्रों, भाषाओं, जातियों और धर्मों के लोगों को एक मंच पर लाकर राष्ट्रीय एकता को मजबूत करते हैं। साथ ही, वे राजनीतिक जागरूकता फैलाकर नागरिकों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति सचेत करते हैं।
7. नेतृत्व और जनसक्रियता का विकास
दल समाज से नए नेताओं को उभारने और उन्हें प्रशिक्षित करने का अवसर देते हैं, जिससे लोकतंत्र में नई ऊर्जा और दृष्टिकोण आता है।
इस प्रकार, राजनीतिक दल केवल सत्ता प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि लोकतंत्र को जीवंत, सक्रिय और प्रभावी बनाए रखने का आधार हैं। उनके ये कार्य राष्ट्र की प्रगति, सामाजिक सद्भाव और राजनीतिक स्थिरता के लिए अनिवार्य हैं।
प्रश्न 7: राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों को मान्यता कौन प्रदान करते हैं और इसके मापदंड क्या हैं?
उत्तर- राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों को मान्यता भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) द्वारा प्रदान की जाती है। यह मान्यता तय मापदंडों के आधार पर दी जाती है, ताकि केवल वही दल आधिकारिक रूप से “राष्ट्रीय” या “राज्य” स्तर पर पहचाने जाएँ जो पर्याप्त जनसमर्थन और चुनावी प्रदर्शन रखते हों।
राष्ट्रीय दल के लिए मापदंड
किसी राजनीतिक दल को “राष्ट्रीय दल” का दर्जा पाने के लिए भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित शर्तों में से कोई एक पूरी करनी होती है —
लोकसभा या विधानसभा चुनाव में कम से कम 4 या अधिक राज्यों में 6% या उससे अधिक वैध मत प्राप्त हों और लोकसभा में कम से कम 4 सीटें जीतें।
लोकसभा की कुल सीटों का कम से कम 2% (वर्तमान में 11 सीटें) जीतें, और ये सीटें कम से कम 3 अलग-अलग राज्यों से हों।
कम से कम 4 राज्यों में “राज्य स्तरीय मान्यता प्राप्त दल” का दर्जा हासिल हो।
राज्य स्तरीय दल के लिए मापदंड
किसी दल को “राज्य स्तरीय दल” का दर्जा पाने के लिए इनमें से कोई एक शर्त पूरी करनी होती है —
राज्य विधानसभा या लोकसभा चुनाव में उस राज्य में 6% या उससे अधिक वैध मत प्राप्त हों और कम से कम 2 विधानसभा सीटें जीतें।
राज्य की कुल विधानसभा सीटों का कम से कम 3% (या कम से कम 3 सीटें, जो भी अधिक हो) जीतें।
पिछले लोकसभा चुनाव में उस राज्य की 1 लोकसभा सीट जीतें।
राज्य में कुल वैध मतों का 8% प्राप्त करें।
इस प्रकार, भारत निर्वाचन आयोग न केवल राजनीतिक दलों को मान्यता देता है बल्कि तय मापदंडों के आधार पर उनकी स्थिति की समीक्षा भी करता है, ताकि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनी रहे।
| अध्याय संख्या | अध्याय का नाम |
|---|---|
| अध्याय 1 | लोकतंत्र में सत्ता की साझेदारी |
| अध्याय 2 | सत्ता में साझेदारी की कार्यप्रणाली |
| अध्याय 3 | लोकतंत्र में प्रतिस्पर्धा एवं संघर्ष |
| अध्याय 4 | लोकतंत्र की उपलब्धियाँ |
| अध्याय 5 | लोकतंत्र की चुनौतियाँ |
