Chapter 1 Solutions – यूरोप में राष्ट्रवाद
Bihar Board Class 10 History Chapter 1 Solutions – यूरोप में राष्ट्रवाद
बिहार बोर्ड कक्षा 10 के इतिहास पाठ्यक्रम की प्रथम इकाई: "यूरोप में राष्ट्रवाद"
यह अध्याय यूरोप के आधुनिकीकरण में राष्ट्रीय चेतना की भूमिका को विस्तार से समझाता है। इस पाठ में छात्रों को 18वीं एवं 19वीं शताब्दी के दौरान यूरोपीय देशों में राष्ट्रीयता की विचारधारा के उभरने, उसके सामाजिक-राजनीतिक प्रभावों और ऐतिहासिक परिवर्तनों का विश्लेषण करने का अवसर मिलेगा। इसमें फ्रांसीसी क्रांति (1789) द्वारा राष्ट्रवाद के बीज बोने, नेपोलियन युग के सुधारों, साथ ही इटली और जर्मनी के एकीकरण जैसी घटनाओं की गहन चर्चा की गई है।
इस इकाई के माध्यम से छात्र यह जानेंगे कि कैसे सांस्कृतिक एकता, भाषा, और साझा इतिहास ने यूरोपीय राष्ट्र-राज्यों के निर्माण को प्रेरित किया। साथ ही, राष्ट्रवाद के दोहरे स्वरूप—साम्राज्यवादी विस्तार और स्वतंत्रता संघर्षों के बीच के तनाव—पर भी प्रकाश डाला गया है। अध्याय के अंत में राष्ट्रवाद के सृजनात्मक (जैसे—राष्ट्रीय एकता) और विध्वंसक (जैसे—युद्धों एवं विभाजनों) प्रभावों को यूरोपीय समाज के संदर्भ में समझाया गया है। यह ज्ञान छात्रों को वर्तमान वैश्विक राजनीति में राष्ट्रवाद की प्रासंगिकता को समझने में सहायक होगा।
मुख्य बिंदु:
- फ्रांसीसी क्रांति और राष्ट्रीय पहचान का जन्म।
- यूरोपीय देशों में सांस्कृतिक जागरण एवं राष्ट्रीय प्रतीकों का निर्माण।
- जर्मन एकीकरण में बिस्मार्क और इटली के गठन में मैजिनी-गैरीबाल्डी की भूमिका।
- राष्ट्रवाद के उदारवादी एवं उग्रवादी स्वरूपों का तुलनात्मक अध्ययन।
- प्रथम विश्व युद्ध की पृष्ठभूमि में राष्ट्रवाद का योगदान।
इस इकाई का उद्देश्य छात्रों को यूरोपीय इतिहास की बहुआयामी समझ प्रदान करना है, जो उन्हें समकालीन राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मुद्दों के विश्लेषण की क्षमता से युक्त करेगी।
यूरोप में राष्ट्रवाद
Notes Credit-Rahul sir
- यूरोप महादेश में सर्वप्रथम राष्ट्रवाद का उदय हुआ
- यूरोप के बाद क्रमश : अन्य देशो (जैसे-भारत) में भी राष्ट्रवाद का उदय हुआ।
- फ्रांसीसी चिंतक 'अनस्ते रेनल' का कहना था, कि जहाँ- समान, धर्म, भाषा, नस्ल के लोग जहाँ रहते है, वह राष्ट्र नहीं है। यहाँ राष्ट्र का तात्पर्य विविधताएं भी हैं. लेकिन सभी का विचार एक ही जैसा हो ।
- राष्ट्रवाद एक विचारधारा है, जो किसी खास भौगोलिक क्षेत्र में रहने वाले लोगो के बीच एकता का वाहक होता है।
- सबसे पहले राष्ट्रवाद की भावना स्पष्ट रूप से फ्रांसीसी क्रांति से अभिव्यक्त हुआ।
- फ्रांसीसी क्रांति के समय- समानता, स्वतंत्रता और बंधुता का विचार अभिव्यक्त हुआ।
- राजतंत्र के स्थान पर लोकतंत्र की स्थापना की गई।
- Note-- नेपोलियन बोनापार्ट ने समानता स्वतंत्रता और बंधुत्व को बढ़ावा देते हुए यूरोप के अधिकांश देशों में शासन किया।
- फ्रांसीसी क्रांति के दौरान इस्टेट जनरल र को समाप्त कर नेशनल असेम्बली की स्थापना की गई।
केन्द्रीय प्रशासनिक व्यवस्था लागू हुई |
क्षेत्रीय बोली पर प्रतिबंध लगाया गया
माप-तौल और मुद्रा में एकरूपता लानेका प्रयास किया गया ।
कानून भी सभी के लिए एक समान किया गया।
1804 में नेपोलियन संहिता का निर्माण हुआ।
Note --कपडा नापने की इकाई ऐले (जर्मन में) था ।
1813 में नेपोलियन बोनापार्टने लिपजिंग का युद्ध लड़ा, परंतु इस युद्ध में नेपोलियन बोनापार्ट की हार हुई
- आस्ट्रिया में हैर्सवर्ग का शासन था राजा यहाँ मेटरनिख था
- रूस में रोमनोव वंश का शासन था।
- 1815 ई. में 'वाटरलू (बेल्जियम) का युद्ध हुआ ।इस युद्ध में भी नेपोलियन बोनापार्ट की हार हुई। इसे पकडकर 'सेंट हेलिना' द्वीप पर भेज दिया गया जहाँ उनकी मृत्यु हो गई।
- 'मेटरनिख → आस्ट्रिया का चांसलर था। इनके द्वारा ऑस्ट्रिया की राजधानी -'वियाना' में सन् 1815 ई. को 'विचाना सम्मेलन' किया।सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य नेपोलियन बोनापार्ट द्वारा स्थापित व्यवस्थाओं का समाप्त कर लोकतंत्र के स्थान पर राजतंत्र की स्थापना करना था
- मेटरनिख का कहना था- जब फ्रांस को सर्दी लगता है, तो पूरा यूरोप छीकता है।
- पुन: फ्रांस में बूर्वो वंश का शासन स्थापित हुआ। तथा लुई XVIII वॉ को राजा बनाया गया।
- मेटरनिख ने इटली पर भी अपना अधिकार बना लिया
- लुई XVIII वाँ के बाद फ्रांस का राजा चार्ल्स दशम' बना।
- चार्ल्स दशम ने अपना प्रधानमंत्री 'पोलिग्नेक' को बनाया।
- 25 जुलाई 1830 को पोलिग्नेक ने संसद में विशेषाधिकार कानून पारित कर दिया।
- फ्रांस की जनता पुनः विरोध प्रदर्शन प्रारम्भकर दिए |
- चार्ल्स दशम् राजगढ़ी छोड़कर 'पोलिग्नेक" के साथ इंग्लैण्ड पलायन कर गया।
- 1830 ई. के क्रांति के परिणाम स्वरूप पुनः बूर्वो वंश का अंत हो गया। और फ्रांस में आर्लिहंस वंश की स्थापना हुई। तथा लुई फिलिप राजा बना।
- इन्होने उदारवादी नीति अपनाकर विशेषाधिकार कानून को समाप्त किया। परंतु लुई फिलिप ने अपना विरोधी' गीजो' को प्रधानमंत्री बनाया
- लुई फिलिप और गीजो अमीरो के प्रभाव में आने से फ्रांस के सर्वहारा वर्ग के लोगो के हित मे कोई भी सहारावार कार्य नहीं किया फ्राँस में भुखमरी और बेरोजगारी की स्थिति बढ्ने लगी।
- 1848 में फ्रांस में पुनः विरोध प्रदर्शन- राजा क्षीर प्रधानमंत्री के खिलाफ प्रारम्भ हो गया। लुई फिलिप और गीजो जान बचाकर इंग्लैण्ड भाग गए।
- फ्रांस में पुन: लोकतंत्र स्थापित हुई, और नेपोलियन- III राजा बना |
- 1848 में ऑस्ट्रिया में भी विरोध प्रदर्शन हुआ, और अंततः मेटरनिख को भी राजगादी त्याग कर इंग्लैण्ड पलायन करना पड़ा
