Bihar Board Class 10 Geography Chapter 1A Solutions – प्राकृतिक संसाधन

बिहार बोर्ड कक्षा 10 भूगोल अध्याय 2 – मृदा संसाधन प्रश्नोत्तर

वस्तुनिष्ठ प्रश्न


लघु उत्तरीय प्रश्न


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

  • जलाक्रांतता मिट्टी में ऑक्सीजन की कमी पैदा करती है, जिससे फसल की जड़ें सड़ जाती हैं।
  • इससे मिट्टी में लवण व क्षार की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे भूमि की उर्वरता घटती है।
  • मिट्टी का ढांचा कमजोर हो जाता है और वह आसानी से बहने लगती है, जिससे मृदा अपरदन बढ़ता है।
    भारत में पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश इस समस्या से सबसे अधिक प्रभावित हैं।

प्रश्न 2. मृदा संरक्षण पर निबंध लिखिए।
उत्तर – मिट्टी हमारी जीवन-रेखा है। यह न केवल भोजन उत्पादन का आधार है बल्कि प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। किंतु मिट्टी का निर्माण लाखों वर्षों में होता है, जबकि उसका विनाश कुछ ही समय में हो सकता है।

मृदा अपरदन तेज हवाओं, वर्षा, बाढ़, वनों की कटाई और अनुचित कृषि पद्धतियों से होता है। इससे उपजाऊ मिट्टी बह जाती है और खेती करना कठिन हो जाता है।
मिट्टी को बचाने के उपाय –

  • वनीकरण करना और पेड़ों की कटाई रोकना।
  • फसल चक्र अपनाना।
  • पहाड़ी क्षेत्रों में सीढ़ीनुमा खेती (Terrace Farming)।
  • कम रासायनिक खाद का प्रयोग और जैविक खाद को बढ़ावा।
  • जल का संतुलित उपयोग और उचित निकासी व्यवस्था।

इन उपायों से मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहेगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी यह संसाधन सुरक्षित रहेगा।

प्रश्न 3. भारत में अत्यधिक पशुधन होने के बावजूद इसका आर्थिक योगदान नगण्य क्यों है ?
उत्तर – भारत विश्व में पशुधन की दृष्टि से समृद्ध देशों में गिना जाता है, लेकिन इसका योगदान राष्ट्रीय आय में अपेक्षाकृत कम है। इसके पीछे अनेक कारण हैं –

  1. चरागाहों की कमी – पशुओं को पर्याप्त चारा नहीं मिल पाता।
  2. नस्ल की कमजोरी – अधिकांश पशु कम दूध व मांस देने वाली नस्लों के हैं।
  3. आधुनिक तकनीक का अभाव – पशुपालन पारंपरिक तरीकों पर आधारित है।
  4. पूंजी की कमी – किसान और पशुपालक आर्थिक रूप से कमजोर हैं।
  5. स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी – पशुओं के लिए पर्याप्त पशु-चिकित्सा केंद्र उपलब्ध नहीं हैं।
  6. बाजार समस्या – पशु-उत्पादों का उचित मूल्य नहीं मिल पाता।

इन कारणों से भारत में अधिक पशुधन होने के बावजूद इसका योगदान कृषि एवं उद्योग में अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुँच पाता।

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