Bihar Board Class 10 Economics Chapter 7 Solutions – उपभोक्ता जागरण एवं संरक्षण

इस अध्याय के माध्यम से विद्यार्थी यह जान पाते हैं कि कैसे एक जागरूक उपभोक्ता बाजार में अपने हितों की रक्षा कर सकता है और अनुचित व्यापारिक गतिविधियों से बच सकता है। इसमें उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, उपभोक्ता अदालतों की भूमिका और विभिन्न उपभोक्ता संगठनों के महत्व को भी सरल भाषा में समझाया गया है।

Bihar Board Class 10 Economics Chapter 7 Solutions छात्रों को यह सिखाता है कि उपभोक्ता जागरूकता केवल अधिकारों की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमें बेहतर आर्थिक निर्णय लेने, सही उत्पाद चुनने और अपने पैसे का उचित उपयोग करने में भी मदद करती है।

संक्षेप में, यह अध्याय विद्यार्थियों को न केवल एक जिम्मेदार और समझदार उपभोक्ता बनाता है, बल्कि उन्हें वास्तविक जीवन में आर्थिक दृष्टि से सक्षम और जागरूक भी बनाता है।

Bihar Board Class 10 Economics Chapter 7 Solutions वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

I. सही विकल्प चुनिए :

प्रश्न 1. भारत में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की घोषणा कब हुई?
(क) 1986
(ख) 1980
(ग) 1987
(घ) 1988
उत्तर – (क) 1986

प्रश्न 2. उपभोक्ता अधिकार दिवस कब मनाया जाता है?
(क) 17 मार्च
(ख) 15 मार्च
(ग) 19 अप्रैल
(घ) 22 अप्रैल
उत्तर – (ख) 15 मार्च

प्रश्न 3. राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर क्या है?
(क) 100
(ख) 1000-100
(ग) 1800-11-4000
(घ) 2000-114000
उत्तर – (ग) 1800-11-4000

प्रश्न 4. स्वर्णाभूषणों (Gold Jewellery) की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए किस चिह्न का होना आवश्यक है?
(क) ISI मार्क
(ख) हॉलमार्क
(ग) एगमार्क
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर – (ख) हॉलमार्क

प्रश्न 5. यदि किसी वस्तु या सेवा का मूल्य 20 लाख से अधिक तथा 1 करोड़ से कम है तो उपभोक्ता शिकायत किसके पास करेगा?
(क) जिला फोरम
(ख) राज्य आयोग
(ग) राष्ट्रीय आयोग
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर – (ख) राज्य आयोग

प्रश्न 6. उपभोक्ता द्वारा शिकायत दर्ज करने के लिए आवेदन शुल्क कितना लगता है?
(क) 50 रु.
(ख) 70 रु.
(ग) 10 रु.
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर – (घ) इनमें से कोई नहीं

Bihar Board Class 10 Economics Chapter 7 Solutions सही / गलत का निशान लगाएँ

प्रश्न 1. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 को संक्षिप्त रूप में कोपरा (COPRA) कहा जाता है।
उत्तर – सही

प्रश्न 2. राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन टेलीफोन नंबर 15,000 है।
उत्तर – गलत

प्रश्न 3. भारत में ‘सूचना का अधिकार अधिनियम’ सन् 2005 में बनाया गया।
उत्तर – सही

प्रश्न 4. उपभोक्ता को खराब वस्तु या सेवा मिलने पर, वह उत्पादक से क्षति की मात्रा के अनुसार मुआवजा पाने का हकदार है।
उत्तर – सही

प्रश्न 5. ‘हॉलमार्क’ स्वर्ण आभूषणों की शुद्धता और गुणवत्ता को प्रमाणित करने वाला मानक चिह्न है।
उत्तर – सही

Bihar Board Class 10 Economics Chapter 7 Solutions लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. आप किसी खाद्य पदार्थ संबंधी वस्तु को खरीदते समय कौन-कौन सी मुख्य बातों का ध्यान रखेंगे?

उत्तर – खाद्य पदार्थ खरीदते समय उपभोक्ता को हमेशा सतर्क रहना चाहिए। सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण वस्तुएँ चुनने के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना आवश्यक है –

  • पैकेट पर निर्माण तिथि (MFD) और समाप्ति तिथि (Expiry Date) अवश्य जांचें।

  • सामग्री सूची (Ingredients) और पोषण संबंधी जानकारी पढ़ें।

  • निर्माता का नाम, पता और वजन/मात्रा स्पष्ट रूप से देखें।

  • गुणवत्ता प्रमाणन चिह्न जैसे FSSAI, ISI या AGMARK अवश्य जांचें।

  • पैकेजिंग सही और सील्ड होनी चाहिए।

  • कीमत और गुणवत्ता का संतुलन देखें तथा कैश मेमो/बिल लेना न भूलें।

इन सभी बातों पर ध्यान देकर ही एक उपभोक्ता सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खरीदारी कर सकता है।


प्रश्न 2. उपभोक्ता जागरण हेतु कुछ प्रमुख नारों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर – उपभोक्ता अधिकारों और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए समय-समय पर कई प्रभावशाली नारे दिए गए हैं। इनमें से कुछ प्रमुख नारे इस प्रकार हैं –

  • जागो ग्राहक जागो!

  • सतर्क उपभोक्ता, सुरक्षित उपभोक्ता।

  • अपने अधिकार जानो, शोषण रोको।

  • गुणवत्ता की मांग करो, मिलावट को नकारो।

  • बिल मांगो, अधिकार पाओ।

ये नारे उपभोक्ताओं को जागरूक बनाते हैं और उन्हें अपने अधिकारों की रक्षा करने के लिए प्रेरित करते हैं।


प्रश्न 3. उपभोक्ता शोषण के कुछ प्रमुख कारकों की चर्चा कीजिए।

उत्तर – बाजार में उपभोक्ताओं का शोषण कई तरीकों से किया जाता है। इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं –

  • खाद्य पदार्थों और वस्तुओं में मिलावट करना।

  • कम तौलना या गलत माप देना।

  • वस्तुओं पर अत्यधिक कीमतें वसूलना या छिपे हुए शुल्क लगाना।

  • भ्रामक विज्ञापन और गलत लेबलिंग द्वारा उपभोक्ताओं को भ्रमित करना।

  • नकली (डुप्लीकेट) और निम्न गुणवत्ता वाले उत्पाद बेचना।

  • अनुचित व्यापार प्रथाओं को अपनाना।

इन कारकों से बचने के लिए उपभोक्ता को जागरूक और सतर्क रहना चाहिए।


प्रश्न 4. उपभोक्ता के रूप में हमारे कुछ कर्तव्यों का वर्णन कीजिए।

उत्तर – उपभोक्ता केवल अधिकारों का ही नहीं, बल्कि कुछ कर्तव्यों का भी पालन करने के लिए जिम्मेदार होता है। एक जिम्मेदार उपभोक्ता को –

  • हर खरीदारी पर बिल/रसीद अवश्य लेनी चाहिए।

  • उत्पाद का लेबल और जानकारी ध्यानपूर्वक पढ़ना चाहिए।

  • गुणवत्ता प्रमाणन चिह्न जैसे ISI, AGMARK या हॉलमार्क की जांच करनी चाहिए।

  • दोषपूर्ण वस्तु या सेवाओं के खिलाफ शिकायत दर्ज करनी चाहिए।

  • अनुचित व्यापार प्रथाओं और मिलावट की जानकारी अधिकारियों तक पहुँचानी चाहिए।

इन कर्तव्यों का पालन कर उपभोक्ता स्वयं को और पूरे समाज को सुरक्षित बना सकता है।


प्रश्न 5. उपभोक्ता कौन होता है? संक्षेप में समझाइए।

उत्तर – उपभोक्ता वह व्यक्ति है जो अपने व्यक्तिगत उपयोग के लिए वस्तुएँ या सेवाएँ खरीदता है। इसमें वे लोग भी शामिल हैं जो खरीदार की अनुमति से उन वस्तुओं या सेवाओं का उपयोग करते हैं। उपभोक्ता बाजार का सबसे महत्वपूर्ण अंग है, क्योंकि उसकी संतुष्टि ही व्यापार का मुख्य उद्देश्य है।

महात्मा गांधी ने भी कहा था –
“उपभोक्ता दुकान में आने वाला सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति होता है। वह हम पर निर्भर नहीं करता, बल्कि पूरा व्यापार उसी पर निर्भर करता है।”

Bihar Board Class 10 Economics Chapter 7 Solutions दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. उपभोक्ता के कौन-कौन से अधिकार हैं? प्रत्येक अधिकार को उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर – उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 (COPRA) के अंतर्गत उपभोक्ताओं को छह मुख्य अधिकार प्रदान किए गए हैं। ये अधिकार उपभोक्ताओं को सुरक्षित, जागरूक और सशक्त बनाते हैं।

  1. सुरक्षा का अधिकार (Right to Safety):
    उपभोक्ता को ऐसी वस्तुओं और सेवाओं से सुरक्षा पाने का अधिकार है जो स्वास्थ्य और जीवन के लिए हानिकारक हों।
    उदाहरण: दोषपूर्ण इलेक्ट्रिक उपकरण या खराब दवाइयों से बचाव।

  2. सूचना का अधिकार (Right to Information):
    उपभोक्ता को उत्पाद की गुणवत्ता, मात्रा, शुद्धता, मानक और मूल्य की सही जानकारी प्राप्त करने का अधिकार है।
    उदाहरण: पैकेज्ड फूड पर पोषण संबंधी जानकारी और MRP का उल्लेख।

  3. चयन का अधिकार (Right to Choose):
    उपभोक्ता को विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं में से अपनी पसंद का चयन करने की स्वतंत्रता है।
    उदाहरण: अलग-अलग ब्रांड के मोबाइल फोन में से किसी एक का चयन करना।

  4. सुनवाई का अधिकार (Right to be Heard):
    उपभोक्ता को अपनी शिकायतें और सुझाव उचित मंच पर रखने का अधिकार है।
    उदाहरण: दोषपूर्ण उत्पाद के लिए उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज करना।

  5. निवारण का अधिकार (Right to Redressal):
    उपभोक्ता को दोषपूर्ण वस्तु या सेवाओं के लिए मुआवजा या प्रतिस्थापन पाने का अधिकार है।
    उदाहरण: खराब टीवी मिलने पर उसका रिप्लेसमेंट या मरम्मत।

  6. उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार (Right to Consumer Education):
    उपभोक्ता को अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के बारे में जानकारी प्राप्त करने का अधिकार है।
    उदाहरण: स्कूलों और कॉलेजों में उपभोक्ता जागरूकता कार्यक्रम।


प्रश्न 2. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 की मुख्य विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर – उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986, उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए बनाया गया था। इसकी मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

  • यह अधिनियम लगभग सभी वस्तुओं और सेवाओं पर लागू होता है।

  • निजी, सार्वजनिक और सहकारी सभी क्षेत्रों पर समान रूप से लागू।

  • अन्य कानूनों के अतिरिक्त उपभोक्ताओं को विशेष सुरक्षा प्रदान करता है।

  • सुरक्षा, सूचना, चयन, निवारण, सुनवाई और शिक्षा जैसे उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा करता है।

  • अनुचित व्यापार प्रथाओं और सेवाओं की कमियों पर रोक लगाता है।

  • खतरनाक वस्तुओं को बाजार से हटाने की मांग का अधिकार देता है।

  • जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर त्रिस्तरीय न्याय प्रणाली स्थापित करता है।

  • उपभोक्ताओं को सरल, त्वरित और कम खर्चीला न्याय प्रदान करता है।


प्रश्न 3. उपभोक्ता संरक्षण हेतु स्थापित त्रिस्तरीय न्यायिक प्रणाली को विस्तार से समझाइए।

उत्तर – उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 के अंतर्गत उपभोक्ताओं की शिकायतों के निवारण हेतु त्रिस्तरीय न्यायिक प्रणाली बनाई गई है।

  1. जिला फोरम (District Forum):

    • 20 लाख रुपये तक के मामलों की सुनवाई करता है।

    • यह स्थानीय स्तर पर उपभोक्ताओं की शिकायतों का निपटारा करता है।

  2. राज्य आयोग (State Commission):

    • 20 लाख से 1 करोड़ रुपये तक के मामलों की सुनवाई करता है।

    • यह जिला फोरम के निर्णयों के खिलाफ अपील भी सुनता है।

  3. राष्ट्रीय आयोग (National Commission):

    • 1 करोड़ रुपये से अधिक राशि के मामलों को देखता है।

    • राज्य आयोग के निर्णयों के खिलाफ अपील सुनता है।

    • इसके निर्णय से असंतुष्ट उपभोक्ता 30 दिनों के भीतर सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकता है।

विशेषताएँ:

  • त्वरित और सस्ता न्याय

  • सरल प्रक्रिया

  • वकील की अनिवार्यता नहीं

  • निर्धारित समय सीमा में निर्णय


प्रश्न 4. उपभोक्ता जागरूकता की आवश्यकता को उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर – उपभोक्ता जागरूकता की आवश्यकता कई कारणों से है –

  1. अनुचित व्यापार प्रथाओं से सुरक्षा:
    व्यापारी अक्सर अधिक लाभ के लिए उपभोक्ताओं का शोषण करते हैं।
    उदाहरण: दुकानदार का कम तौलना या मिलावटी खाद्य पदार्थ बेचना।

  2. गुणवत्ता सुनिश्चित करना:
    उपभोक्ता अपने पैसों के बदले सही गुणवत्ता चाहते हैं।
    उदाहरण: ऐसा मोबाइल फोन जो विज्ञापित फीचर्स के अनुरूप काम न करे।

  3. सूचित निर्णय लेना:
    जागरूक उपभोक्ता सही निर्णय ले सकता है।
    उदाहरण: पैकेज्ड फूड पर पोषण लेबल देखकर स्वस्थ विकल्प चुनना।

  4. अधिकारों का प्रयोग:
    जागरूक उपभोक्ता कानूनी अधिकारों का उपयोग कर सकता है।
    उदाहरण: दोषपूर्ण उत्पाद के लिए उपभोक्ता फोरम में शिकायत करना।

  5. बाजार सुधार:
    उपभोक्ता जागरूकता से व्यापारी भी बेहतर उत्पाद और सेवाएँ देने लगते हैं।


प्रश्न 5. मानवाधिकार आयोग का महत्व लिखिए।

उत्तर – मानवाधिकार आयोग का महत्व अत्यंत व्यापक है। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं –

  • नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना।

  • मानवाधिकार उल्लंघनों की स्वतंत्र जांच और निगरानी।

  • शिकायतों का निवारण और पीड़ितों को सहायता।

  • समाज में मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाना।

  • सरकार को नीतिगत सुझाव देना।

  • भारत में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों का पालन सुनिश्चित करना।

  • समाज के कमजोर वर्गों (महिलाएँ, बच्चे, मजदूर आदि) की सुरक्षा करना।

  • न्यायालयों में हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने में मदद करना।

निष्कर्ष: मानवाधिकार आयोग लोकतंत्र और मानवीय गरिमा की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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