Bihar Board Class 10 Economics Chapter 2 Solutions – राज्य एवं राष्ट्र की आय (Hindi Medium)

📘 परिचय
बिहार बोर्ड कक्षा 10 अर्थशास्त्र का दूसरा अध्याय “राज्य एवं राष्ट्र की आय” विद्यार्थियों को अर्थशास्त्र की एक अत्यंत महत्वपूर्ण अवधारणा से परिचित कराता है। इस अध्याय के माध्यम से छात्र यह समझते हैं कि किसी राज्य या राष्ट्र की आर्थिक स्थिति (Economic Health) को किस प्रकार मापा जाता है और यह किसी देश के विकास स्तर को दर्शाने में कितना उपयोगी है।
Bihar Board Class 10 Economics Chapter 2 Solutions वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. सन् 2008-09 के अनुसार भारत की औसत प्रति व्यक्ति आय है
(क) 22,553 रुपये
(ख) 25,494 रुपये ✅
(ग) 6,610 रुपये
(घ) 54,850 रुपये
👉 सही उत्तर – (ख) 25,494 रुपये
प्रश्न 2. भारत में वित्तीय वर्ष कहा जाता है-
(क) 1 जनवरी से 31 दिसम्बर तक
(ख) 1 जुलाई से 30 जून तक।
(ग) 1 अप्रैल से 31 मार्च तक ✅
(घ) 1 दिसम्बर से 31 अगस्त तक
👉 सही उत्तर – (ग) 1 अप्रैल से 31 मार्च तक
प्रश्न 3. भारत में किस राज्य का प्रति व्यक्ति आय सर्वाधिक है ?
(क) बिहार
(ख) पंजाब
(ग) हरियाणा
(घ) गोवा ✅
👉 सही उत्तर – (घ) गोवा
प्रश्न 4. बिहार के किस जिले का प्रति-व्यक्ति आय सर्वाधिक है ?
(क) पटना ✅
(ख) गया
(ग) शिवहर
(घ) नालंदा
👉 सही उत्तर – (क) पटना
प्रश्न 5. उत्पादन एवं आय गणना विधि आर्थिक दृष्टिकोण से है
(क) सहज
(ख) वैज्ञानिक
(ग) व्यावहारिक
(घ) उपर्युक्त तीनों ✅
👉 सही उत्तर – (घ) उपर्युक्त तीनों
Bihar Board Class 10 Economics Chapter 2 Solutions रिक्त स्थानों को भरें
- बिहार की 41.4 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा के नीचे गुजर-बसर करती है।
- उत्पादन, आय एवं व्यय एक चक्रीय समूह का निर्माण करते हैं।
- आय में वृद्धि होने से प्रति-व्यक्ति आय में वद्धि होती है।
- राष्ट्रीय आय एवं प्रति-व्यक्ति आय में वृद्धि होने से विकास”की क्रिया पूरी होती है।
- बिहार में वर्ष 2008-09 के बीच कुल घरेलू उत्पाद 11.03 प्रतिशत हो गया।
Bihar Board Class 10 Economics Chapter 2 Solutions सही एवं गलत
उत्तर-
- राष्ट्रीय आय एक दिन हुए समय का किसी अर्थव्यवस्था की उत्पादन शक्ति को मापती है। – सही
- उत्पादन आय एवं व्यय एक चक्रीय समूह का निर्माण नहीं करती है। – गलत
- भारत की प्रति-व्यक्ति आय अमेरिका के प्रति व्यक्ति आय से अधिक है। – गलत
- दादा भाई नैरोजी के अनुसार सन् 1968 में भारत की प्रति-व्यक्ति आय 20 रुपये थी। – सही
- बिहार के प्रति व्यक्ति आय में कृषि क्षेत्र का योगदान सर्वाधिक है। – सही
Bihar Board Class 10 Economics Chapter 2 Solutions संक्षिप्त रूप को पूरा करें
महत्वपूर्ण संक्षिप्त रूप एवं उनके पूर्ण रूप (Full Forms in Economics):
G.D.P.
👉 Gross Domestic Product – सकल घरेलू उत्पादP.C.I.
👉 Per Capita Income – प्रति व्यक्ति आयN.S.S.O.
👉 National Sample Survey Organisation – राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठनC.S.O.
👉 Central Statistical Organisation – केंद्रीय सांख्यिकी संगठनG.N.P.
👉 Gross National Product – सकल राष्ट्रीय उत्पादN.N.P.
👉 Net National Product – शुद्ध राष्ट्रीय उत्पादN.I.
👉 National Income – राष्ट्रीय आयE.D.I.
👉 Economic Development of India – भारत का आर्थिक विकास
Bihar Board Class 10 Economics Chapter 2 Solutions लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. आय से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: जब कोई व्यक्ति अपने शारीरिक अथवा मानसिक श्रम के बदले धन या वस्तु के रूप में पारिश्रमिक प्राप्त करता है, तो उसे उसकी आय कहा जाता है। आय से ही व्यक्ति अपनी मूलभूत आवश्यकताओं जैसे भोजन, वस्त्र, शिक्षा और स्वास्थ्य की पूर्ति करता है।
प्रश्न 2. सकल घरेलू उत्पाद (GDP) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: किसी देश की भौगोलिक सीमाओं के भीतर एक निश्चित अवधि (सामान्यतः एक वर्ष) में उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं के कुल मौद्रिक मूल्य को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) कहते हैं। यह किसी देश की आर्थिक प्रगति और उत्पादन क्षमता का सबसे महत्वपूर्ण मापदंड है।
प्रश्न 3. प्रतिव्यक्ति आय क्या है?
उत्तर: राष्ट्रीय आय को देश की कुल जनसंख्या से विभाजित करने पर प्राप्त आंकड़े को प्रतिव्यक्ति आय कहते हैं।
➡️ प्रतिव्यक्ति आय का सूत्र:

यह किसी देश के नागरिकों के औसत जीवन स्तर का महत्वपूर्ण सूचक है।
प्रश्न 4. भारत में सर्वप्रथम राष्ट्रीय आय की गणना कब और किनके द्वारा की गई थी?
उत्तर: भारत में राष्ट्रीय आय की गणना सर्वप्रथम 1868 ई. में दादाभाई नौरोजी ने की थी। उन्होंने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक “पावर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया” में यह उल्लेख किया था कि किस प्रकार औपनिवेशिक शासन के कारण भारत की आय प्रभावित हो रही थी।
प्रश्न 5. भारत में राष्ट्रीय आय की गणना किस संस्था द्वारा की जाती है?
उत्तर: भारत में राष्ट्रीय आय की गणना का कार्य केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (CSO) द्वारा किया जाता है। यह संगठन राष्ट्रीय स्तर पर सांख्यिकीय आंकड़े एकत्रित कर, उनका विश्लेषण करके देश की आर्थिक स्थिति का आकलन प्रस्तुत करता है।
प्रश्न 6. राष्ट्रीय आय की गणना में कौन-कौन सी कठिनाइयाँ आती हैं?
उत्तर: राष्ट्रीय आय की गणना आसान नहीं है। इसमें कई प्रकार की कठिनाइयाँ सामने आती हैं, जैसे:
अपूर्ण आंकड़े – ग्रामीण क्षेत्रों से सटीक डेटा प्राप्त करना कठिन होता है।
दोहरी गणना की समस्या – एक ही वस्तु का मूल्य बार-बार जोड़ दिया जाता है।
अमूल्य सेवाएँ – जैसे गृहिणी का श्रम, स्वेच्छा से किया गया कार्य आदि को मूल्यांकन में शामिल नहीं किया जाता।
अनौपचारिक क्षेत्र का आकलन कठिन – छोटे व्यापारी और असंगठित श्रमिकों की सही आय का पता लगाना मुश्किल होता है।
प्रश्न 7. आय का गरीबी के साथ क्या संबंध है?
उत्तर: आय और गरीबी का सीधा संबंध है। यदि आय कम होती है, तो व्यक्ति अपनी आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर पाता और गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन करता है।
गरीबी के कारण बचत और पूँजी निर्माण घट जाता है।
निवेश की कमी से उत्पादन क्षमता भी प्रभावित होती है।
इसके परिणामस्वरूप प्रति व्यक्ति आय कम रहती है और गरीबी का दुष्चक्र चलता रहता है।
Bihar Board Class 10 Economics Chapter 2 Solutions दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् भारत सरकार ने कब और किस उद्देश्य से राष्ट्रीय आय समिति का गठन किया?
उत्तर:
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत सरकार ने अगस्त 1949 में राष्ट्रीय आय समिति (National Income Committee) का गठन किया। इस समिति के अध्यक्ष प्रो. पी. सी. महालनोबिस थे और इसमें प्रो. डी. आर. गाडगिल तथा प्रो. वी. के. आर. वी. राव भी सदस्य थे।
इस समिति का मुख्य उद्देश्य था –
भारत की राष्ट्रीय आय का सटीक आकलन करना,
विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों के योगदान का पता लगाना,
और आर्थिक योजनाओं के लिए आवश्यक विश्वसनीय आँकड़े एकत्रित करना।
अप्रैल 1951 में समिति ने अपनी पहली रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसमें बताया गया कि वर्ष 1948-49 के लिए भारत की कुल राष्ट्रीय आय 8,650 करोड़ रुपये और प्रति व्यक्ति आय 246.9 रुपये थी। इसके बाद 1954 में, सरकार ने केन्द्रीय सांख्यिकी संगठन (C.S.O.) की स्थापना की, जो आज भी राष्ट्रीय आय से जुड़े आँकड़े एकत्रित और प्रकाशित करता है।
प्रश्न 2. राष्ट्रीय आय की परिभाषा दें। इसकी गणना की प्रमुख विधि कौन-कौन सी है?
उत्तर:
राष्ट्रीय आय से तात्पर्य है – किसी देश में एक वर्ष के भीतर उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं के कुल मौद्रिक मूल्य का योग। यह किसी राष्ट्र की आर्थिक प्रगति का सबसे महत्वपूर्ण सूचकांक है।
राष्ट्रीय आय की गणना के लिए तीन प्रमुख विधियाँ हैं:
उत्पादन विधि (Production Method):
इसमें देश के कृषि, उद्योग, सेवा, व्यापार आदि सभी क्षेत्रों में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं का कुल मूल्य जोड़ा जाता है।आय विधि (Income Method):
इसमें नागरिकों द्वारा अर्जित कुल आय को जोड़ा जाता है, जैसे – मजदूरी, वेतन, किराया, ब्याज और लाभ।व्यय विधि (Expenditure Method):
इसमें देश में उपभोग, निवेश, सरकारी खर्च और शुद्ध निर्यात पर किए गए कुल व्यय का योग किया जाता है।
प्रश्न 3. प्रति व्यक्ति आय और राष्ट्रीय आय में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर:
राष्ट्रीय आय (National Income): यह किसी देश में एक वर्ष के दौरान उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं का कुल मौद्रिक मूल्य है।
प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income): यह राष्ट्रीय आय को देश की कुल जनसंख्या से भाग देकर प्राप्त की जाती है।
👉 उदाहरण: यदि किसी देश की राष्ट्रीय आय 1,00,000 करोड़ रुपये है और जनसंख्या 10 करोड़ है, तो प्रति व्यक्ति आय 10,000 रुपये होगी।
सारांश:
राष्ट्रीय आय से देश की कुल आर्थिक शक्ति का पता चलता है, जबकि प्रति व्यक्ति आय यह दर्शाती है कि औसतन प्रत्येक नागरिक को कितनी आय प्राप्त हो रही है।
प्रश्न 4. राष्ट्रीय आय में वृद्धि भारतीय विकास के लिए किस तरह से लाभप्रद है?
उत्तर:
राष्ट्रीय आय में वृद्धि का मतलब है कि देश में उत्पादन और सेवाओं की मात्रा बढ़ रही है। इससे देश को कई लाभ होते हैं:
रोजगार के अवसरों में वृद्धि – अधिक उत्पादन से अधिक श्रमिकों की आवश्यकता होती है।
जनता की आय और जीवन स्तर में सुधार – आय बढ़ने पर लोग स्वास्थ्य, शिक्षा और बेहतर जीवन शैली पर खर्च कर सकते हैं।
सरकारी राजस्व में वृद्धि – अधिक आय से सरकार को टैक्स के रूप में ज्यादा राजस्व प्राप्त होता है।
बुनियादी ढांचे का विकास – उच्च राष्ट्रीय आय से सड़कों, अस्पतालों, स्कूलों और उद्योगों में निवेश बढ़ता है।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती – उच्च आय से विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होता है और देश वैश्विक व्यापार में प्रतिस्पर्धी बनता है।
प्रश्न 5. विकास में प्रति-व्यक्ति आय पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।
उत्तर:
प्रति व्यक्ति आय किसी देश की औसत आय का सूचक है। यह दर्शाती है कि देश में आर्थिक विकास का लाभ आम नागरिकों तक कितना पहुँच रहा है।
उच्च प्रति व्यक्ति आय से नागरिकों का जीवन स्तर सुधरता है।
लोग बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं।
इससे सामाजिक असमानता कम होती है और आर्थिक स्थिरता बढ़ती है।
यह किसी भी देश की विकास दर का आधारभूत पैमाना है।
प्रश्न 6. क्या प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि राष्ट्रीय आय को प्रभावित करती है? वर्णन करें।
उत्तर:
हाँ, प्रति व्यक्ति आय और राष्ट्रीय आय एक-दूसरे से सीधे जुड़े हुए हैं।
राष्ट्रीय आय = प्रति व्यक्ति आय × कुल जनसंख्या।
जब प्रति व्यक्ति आय बढ़ती है, तो यह दर्शाता है कि देश की उत्पादन क्षमता और आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ रही हैं।
उच्च प्रति व्यक्ति आय से लोगों की क्रय शक्ति (Purchasing Power) बढ़ती है, जिससे मांग बढ़ती है और उद्योगों का विस्तार होता है।
इससे अधिक रोजगार सृजन, अधिक कर संग्रह और सरकारी योजनाओं के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध होते हैं।
👉 निष्कर्षतः, प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि से राष्ट्रीय आय स्वतः प्रभावित होकर बढ़ती है और यह देश की समग्र समृद्धि का प्रतीक बनती है।
📚Bihar Board Class 10 Economics Chapter 2 Solutions
(Hindi Medium)
| अध्याय संख्या | अध्याय का नाम | Solutions (प्रश्नोत्तर) लिंक |
|---|---|---|
| Chapter 1 | अर्थव्यवस्था एवं इसके विकास का इतिहास | 👉 Chapter 1 Solutions |
| Chapter 2 | राज्य एवं राष्ट्र की आय | 👉 Chapter 2 Solutions |
| Chapter 3 | मुद्रा, बचत एवं साख | 👉 Chapter 3 Solutions |
| Chapter 4 | हमारी वित्तीय संस्थाएँ | 👉 Chapter 4 Solutions |
| Chapter 5 | रोजगार एवं सेवाएँ | 👉 Chapter 5 Solutions |
| Chapter 6 | वैश्वीकरण | 👉 Chapter 6 Solutions |
| Chapter 7 | उपभोक्ता जागरण एवं संरक्षण | 👉 Chapter 7 Solutions |
