बिहार बोर्ड कक्षा 10 के इतिहास पाठ्यक्रम का दूसरा अध्याय “समाजवाद एवं साम्यवाद” मानवीय मूल्यों और सामाजिक न्याय की खोज पर केंद्रित है। यह अध्याय हमें उन परिस्थितियों से रूबरू कराता है, जब औद्योगिक क्रांति के बाद मजदूरों के शोषण, अमीर-गरीब के बीच बढ़ती खाई, और मानवीय गरिमा को ठेस पहुँचाने वाली असमानताओं ने नए विचारों को जन्म दिया। इन्हीं में से समाजवाद और साम्यवाद की विचारधाराएँ उभरीं, जिनका लक्ष्य था—“सबके लिए समानता और न्याय”।
इस पाठ में आप जानेंगे कि कैसे कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स जैसे विचारकों ने पूँजीवादी व्यवस्था की कमियों को उजागर करते हुए एक ऐसे समाज की कल्पना की, जहाँ संसाधनों पर सभी का अधिकार हो, शोषण न हो, और मनुष्य की पहचान उसके श्रम से हो। आप देखेंगे कि कैसे इन विचारों ने रूसी क्रांति (1917) को प्रेरित किया, जिसने न केवल रूस बल्कि पूरी दुनिया में मजदूरों और गरीबों की आशाओं को नई दिशा दी।
साथ ही, यह अध्याय 20वीं सदी के वैश्विक परिदृश्य को समझने में मदद करता है। जैसे—शीतयुद्ध के दौरान विचारधाराओं का टकराव, स्वतंत्रता संग्रामों पर समाजवाद का प्रभाव, और आज भी समानता की चाह रखने वाले आंदोलनों की जड़ें। यहाँ केवल घटनाओं का विवरण नहीं, बल्कि मानवीय संघर्ष, सपनों और सामूहिक प्रयासों की गाथा है।
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Bihar Board Class 10 History Chapter 2 समाजवाद एवं साम्यवाद

Bihar Board Class 10 History Chapter 2 वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. रूस में कृषक दास प्रथा का अंत कब हुआ?
(क) 1861
(ख) 1862
(ग) 1863
(घ) 1864
उत्तर- (क)
प्रश्न 2. रूस में जार का अर्थ क्या होता था ?
(क) पीने का बर्तन .
(ख) पानी रखने का मिट्टी का पात्र
(ग) रूस का सामन्त
(घ) रूस का सम्राट
उत्तर- (घ)
प्रश्न 3. कार्ल मार्क्स का जन्म कहाँ हुआ था?
(क) इंगलैंड
(ख) जर्मनी
(ग) इटली
(घ) रूस
उत्तर- (ख)
प्रश्न 4. साम्यवादी शासन का पहला प्रयोग कहाँ हुआ?
(क) रूस
(ख) जापान
(ग) चीन
(घ) क्यूबा
उत्तर- (क)
प्रश्न 5. यूटोपियन समाजवादी कौन नहीं था?
(क) लुई ब्लां
(ख) सेंट साइमन
(ग) कार्ल मार्क्स
(घ) रॉबर्ट ओवन
उत्तर- (ग)
प्रश्न 6. “वार एंड पीस’ किसकी रचना है ?
(क) कार्ल मार्क्स
(ख) टॉलस्टाय
(ग) दोस्तोवस्की
(घ) ऐंजल्स
उत्तर- (ख)
प्रश्न 7. बोल्शेविक क्रांति कब हुई ?
(क) फरवरी 1947
(ख) नवंबर 1917
(ग) अप्रैल 1917
(घ) अक्टूबर 1905
उत्तर- (ख)
प्रश्न 8. लाल सेना का गठन किसने किया था ?
(क) कार्ल मार्क्स
(ख) स्टालिन
(ग) ट्रॉटसकी
(घ) करेंसकी
उत्तर- (ग)
प्रश्न 9. लेनिन की मृत्यु कब हुई थी?
(क) 1921
(ख) 1922
(ग) 1923
(घ) 1924
उत्तर- (घ)
प्रश्न 10. ब्रेस्टलिटोवस्क की संधि किन देशों के बीच हुआ था ?
(क) रूस और इटली
(ख) रूस और फ्रांस
(ग) रूस और इंगलैंड
(घ) रूस और जर्मनी
उत्तर- (घ)
Bihar Board Class 10 History Chapter 2 रिक्त स्थानों को भरें :
- रूसी क्रांति के समय शासक जार निकालेस था।
- बोल्शेविक क्रांति का नेतृत्व लेनिन ने किया था।
- नई आर्थिक नीति 1921 ई. में लागू हुआ था।
- राबर्ट ओवन ब्रिटेन का निवासी था।
- वैज्ञानिक समाजवाद का जनक कार्ल मार्क्स को माना जाता है।
मिलान करें :
| समूह ‘अ’ | समूह ‘ब’ |
|---|---|
| दास कैपिटल | (ख) कार्ल मार्क्स |
| चेकां | (घ) गुप्त पुलिस संगठन |
| नई आर्थिक नीति | (ङ) लेनिन |
| कार्ल मार्क्स की मृत्यु | (ग) 1883 |
| स्टालिन की मृत्यु | (क) 1953 |
Bihar Board Class 10 History Chapter 2 समाजवाद एवं साम्यवाद
अतिलघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1: राष्ट्रवाद क्या है?
उत्तर:-राष्ट्रवाद एक ऐसी भावना है जो किसी विषेश भौगोलिक, सांस्कृतिक या सामाजिक परिवेश में रहने वाले लोगों में एकता का वाहक बनती है।
प्रश्न 2: खूनी रविवार क्या है?
उत्तर:-रूस-जापान युद्ध में रूस के पराजय के कारण 9 जनवरी 1905 को लोगों का समूह ‘रोटी दो‘ के नारे के साथ सड़कों पर प्रदर्शन करते हुए सेंट पीटर्सवर्ग स्थित महल की ओर जा रहा था। परन्तु जार की सेना ने निहत्थे लोगों पर गोलियां बरसाईं, जिससे हजारों लोग मारे गए। इसे खूनी रविवार कहा जाता है।
प्रश्न 3: अक्टूबर क्रांति क्या है?
उत्तर:-अक्टूबर की क्रांति 1917 में व्लादिमीर लेनिन के नेतृत्व में बोल्शेविकों द्वारा रूसी सरकार को उखाड़कर विश्व का पहला समाजवादी राज्य स्थापित करने की ऐतिहासिक घटना थी जिसे अक्टूबर क्रांति कहते है । (जुलियन कैलेंडर के अनुसार अक्टूबर)।
प्रश्न 4: सर्वहारा वर्ग किसे कहते हैं?
उत्तर:-सर्वहारा वर्ग उन श्रमिकों या मजदूरों को कहते हैं जिनके पास उत्पादन के साधनों का स्वामित्व नहीं होता और जो अपने श्रम के बदले मजदूरी प्राप्त करते हैं। यह वर्ग पूंजीवाद में शोषित होता है।
प्रश्न 5: क्रांति से पूर्व रूसी किसानों की स्थिति कैसी थी?
उत्तर:-क्रांति से पूर्व रूसी किसानों की स्थिति दयनीय थी। वे जमींदारों के अधीन थे, भारी कर और कर्ज़ में दबे रहते थे, गरीबी, भुखमरी और शोषण का शिकार होते थे।
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1: रूसी क्रांति के किन्हीं दो कारणों का वर्णन करें।
उत्तर:-रूसी क्रांति के दो प्रमुख कारण:
1. जार की निरंकुशता एवं अयोग्य शासन –रूस में जार निकोलस द्वितीय की तानाशाही सरकार थी, जिसने जनता की समस्याओं की अनदेखी की। लोकतंत्र की मांग बढ़ रही थी, लेकिन सरकार दमनकारी थी।
2. आर्थिक संकट – प्रथम विश्व युद्ध के दौरान रूस की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई। खाद्य संकट, महंगाई और बेरोजगारी बढ़ गई, जिससे आम जनता और किसानों में असंतोष फैल गया।
प्रश्न 2: रूसीकरण की नीति क्रांति हेतु कहाँ तक उत्तरदायी थी?
उत्तर:-रूसीकरण की नीति का उद्देश्य पूरे रूसी साम्राज्य में रूसी भाषा, संस्कृति और परंपराओं को थोपना था। इस नीति के तहत गैर-रूसी भाषाओं, धर्मों और संस्कृतियों को दबाया गया, जिससे विभिन्न जातीय समूहों में असंतोष बढ़ा। विशेष रूप से पोलैंड, फिनलैंड और बाल्टिक क्षेत्रों में यह नीति विरोध का कारण बनी।
इस दमनकारी नीति से राष्ट्रीयता आधारित विद्रोह उभरे, जिससे क्रांति के प्रति समर्थन बढ़ा और अंततः 1917 की रूसी क्रांति को बल मिला।
प्रश्न 3: साम्यवाद एक नई आर्थिक एवं सामाजिक व्यवस्था थी। कैसे?
उत्तर:-साम्यवाद एक ऐसी आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था थी जिसमें उत्पादन के सभी साधनों (जमीन, कारखाने, उद्योग) का सामूहिक स्वामित्व होता है। इसमें निजी संपत्ति का उन्मूलन कर सभी संसाधनों का समान वितरण किया जाता है।
यह व्यवस्था वर्गहीन समाज की स्थापना पर बल देती है, जहाँ श्रमिकों का शोषण समाप्त हो और सरकार समाज के हित में कार्य करे। रूसी क्रांति के बाद यह विचारधारा एक नए समाज और अर्थव्यवस्था की नींव बनी।
प्रश्न 4: नई आर्थिक नीति मार्क्सवादी सिद्धान्तों के साथ समझौता था, कैसे?
उत्तर:-नई आर्थिक नीति (NEP) 1921 में व्लादिमीर लेनिन द्वारा लागू की गई थी। यह नीति साम्यवादी अर्थव्यवस्था से अस्थायी रूप से हटकर बाज़ार आधारित सुधारों की अनुमति देती थी, जिसमें छोटे व्यवसायों और निजी खेती को बढ़ावा दिया गया।
मार्क्सवाद पूर्ण राज्य नियंत्रण और निजी संपत्ति के उन्मूलन पर आधारित था, जबकि NEP ने सीमित निजी स्वामित्व और बाज़ार व्यवस्था को अपनाया। इसलिए, यह नीति शुद्ध मार्क्सवादी सिद्धांतों से एक व्यावहारिक समझौता थी, जिससे रूस की अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित किया जा सके।
प्रश्न 5: प्रथम विश्वयुद्ध में रूस की पराजय क्रांति हेतु मार्ग प्रशस्त किया, कैसे?
उत्तर:-प्रथम विश्वयुद्ध (1914-1918) में रूस को भारी सैन्य पराजय का सामना करना पड़ा। सेना के पास पर्याप्त हथियार, भोजन और आपूर्ति नहीं थी, जिससे सैनिकों का मनोबल गिर गया। युद्ध के दौरान लाखों सैनिक मारे गए, और जनता में आक्रोश बढ़ता गया।
आर्थिक संकट गहरा गया, महंगाई और बेरोजगारी बढ़ी, जिससे किसानों और मजदूरों में असंतोष फैल गया। ज़ार निकोलस द्वितीय की अक्षमता और युद्ध में हार ने जनता को विद्रोह के लिए प्रेरित किया, जिससे 1917 की रूसी क्रांति की राह तैयार हुई।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1: रूसी क्रांति के कारणों की विवेचना करें।
उत्तर:-रूसी क्रांति (1917) कई राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और तत्कालीन परिस्थितियों के परिणामस्वरूप हुई। इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
1. राजनीतिक कारण
- रूस में ज़ार निकोलस द्वितीय की निरंकुश शासन प्रणाली थी, जिसने जनता की समस्याओं की अनदेखी की।
- लोकतंत्र की मांग को दबाने के लिए सरकार ने दमनकारी नीतियाँ अपनाईं।
2. आर्थिक कारण
- रूस की अर्थव्यवस्था कृषि पर निर्भर थी, लेकिन किसान जमींदारी प्रथा के कारण शोषित थे।
- मजदूर वर्ग को कारखानों में अत्यधिक श्रम करना पड़ता था, लेकिन वे बहुत कम मजदूरी पाते थे।
3. सामाजिक कारण
- समाज में भारी वर्ग भेद था—ज़ार, पूंजीपति और चर्च विशेषाधिकार प्राप्त थे, जबकि किसान और मजदूर शोषित थे।
- रूसीकरण की नीति से गैर-रूसी समुदाय असंतुष्ट थे।
4. प्रथम विश्वयुद्ध का प्रभाव
- रूस की सेना को भारी पराजय का सामना करना पड़ा, जिससे सैनिकों का मनोबल टूट गया।
- युद्धकाल में खाद्य संकट और महंगाई बढ़ने से जनता और सैनिकों में असंतोष बढ़ा।
5. बोल्शेविकों की भूमिका
- व्लादिमीर लेनिन और बोल्शेविक पार्टी ने ‘शांति, रोटी और भूमि’ के नारे से जनता को संगठित किया।
- समाजवाद और समानता की विचारधारा ने मजदूरों और किसानों को क्रांति के लिए प्रेरित किया।
प्रश्न 2: नई आर्थिक नीति क्या है?
उत्तर:-नई आर्थिक नीति (NEP) 1921 में व्लादिमीर लेनिन द्वारा लागू की गई थी। इसका उद्देश्य रूस की कमजोर अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करना था, जो प्रथम विश्वयुद्ध और गृहयुद्ध के कारण बुरी तरह प्रभावित हुई थी। इस नीति के तहत सीमित निजी व्यापार और छोटे उद्योगों की अनुमति दी गई, जबकि बड़े उद्योग, बैंक और परिवहन सरकार के नियंत्रण में रहे।
किसानों को अपनी उपज बेचने की छूट दी गई, जिससे कृषि उत्पादन बढ़ा। यह नीति अस्थायी रूप से बाज़ार अर्थव्यवस्था की ओर झुकी, जो साम्यवादी सिद्धांतों के साथ एक समझौता था। इससे रूस की अर्थव्यवस्था में स्थिरता आई।
प्रश्न 3: रूसी क्रांति के प्रभाव की विवेचना करें।
उत्तर:-रूसी क्रांति (1917) ने विश्व को गहराई से प्रभावित किया। इससे जारशाही का अंत हुआ और समाजवादी शासन स्थापित हुआ। मजदूरों और किसानों को उनके अधिकार मिले, जिससे श्रमिक आंदोलनों को बल मिला। इस क्रांति ने दुनिया भर में समाजवाद और साम्यवाद के विचारों को प्रेरित किया। भारत सहित कई देशों के स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा मिली। औद्योगीकरण व आर्थिक समानता पर ज़ोर दिया गया। द्वितीय विश्व युद्ध और शीत युद्ध की नींव भी इसी से पड़ी। कुल मिलाकर, रूसी क्रांति ने सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक बदलाव की नई लहर शुरू की।
प्रश्न 4: कार्ल मार्क्स की जीवनी एवं सिद्धान्तों का वर्णन करें।
उत्तर:-कार्ल मार्क्स का जन्म 5 मई 1818 को जर्मनी के ट्रियर नगर में हुआ। उनके पिता, हेनरिक मार्क्स, एक प्रतिष्ठित वकील थे। उन्होंने बोन विश्वविद्यालय में कानून की पढ़ाई की और बाद में बर्लिन विश्वविद्यालय में सामाजिक और राजनीतिक चिंतन की ओर आकर्षित हुए। वहाँ वे हीगल के विचारों से प्रभावित हुए। 1843 में उन्होंने जेनी से विवाह किया। 1844 में पेरिस में उनकी मुलाकात फ्रेडरिक एंगेल्स से हुई, जिनके साथ मिलकर उन्होंने 1848 में “साम्यवादी घोषणापत्र” लिखा। 1867 में उनकी प्रमुख रचना “दास कैपिटल” प्रकाशित हुई। उनके विचारों में द्वंद्वात्मक भौतिकवाद, वर्ग संघर्ष, इतिहास की भौतिकवादी व्याख्या और राज्यहीन वर्गहीन समाज की संकल्पना शामिल हैं। उनके सिद्धांतों ने श्रमिक आंदोलनों और समाजवादी विचारधारा को गहराई से प्रभावित किया।
प्रश्न 5: यूटोपियन समाजवादियों के विचारों का वर्णन करें।
उत्तर:-यूटोपियन समाजवादियों ने एक आदर्श समाज की कल्पना की, जहाँ समानता, न्याय और सहकारिता का राज हो। वे पूंजीवाद की बुराइयों को देखते थे लेकिन समाज में बदलाव के लिए क्रांति की जगह शांतिपूर्ण सुधारों पर जोर देते थे। प्रमुख यूटोपियन समाजवादी रॉबर्ट ओवेन, सेंट साइमन और चार्ल्स फूरिएर थे। ओवेन ने श्रमिकों के कल्याण के लिए आदर्श औद्योगिक समुदाय बनाए, जबकि फूरिएर ने सामूहिक कृषि और उत्पादन की वकालत की। सेंट साइमन वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति से समाज के विकास में विश्वास रखते थे। उनके विचारों ने आगे चलकर समाजवादी और साम्यवादी आंदोलनों को प्रेरणा दी।
| अध्याय संख्या | अध्याय का नाम |
|---|---|
| अध्याय 1 | यूरोप में राष्ट्रवाद |
| अध्याय 2 | समाजवाद एवं साम्यवाद |
| अध्याय 3 | हिन्द-चीन में राष्ट्रवादी आंदोलन |
| अध्याय 4 | भारत में राष्ट्रवाद |
| अध्याय 5 | अर्थव्यवस्था और आजीविका |
| अध्याय 6 | शहरीकरण एवं शहरी जीवन |
| अध्याय 7 | व्यापार और भूमंडलीकरण |
| अध्याय 8 | प्रेस-संस्कृति एवं राष्ट्रवाद |
