Bihar Board Class 10 History Chapter 6 Solutions – शहरीकरण एवं शहरी जीवन

Bihar Board Class 10 History Chapter 6 Solutions – शहरीकरण एवं शहरी जीवन

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बिहार बोर्ड कक्षा 10 के इतिहास पाठ्यक्रम का छठा अध्याय “शहरीकरण एवं शहरी जीवन” आधुनिक भारत में शहरों के विकास को उनमें रहने वाले लोगों के अनुभवों, संघर्षों और सपनों के माध्यम से देखता है। यह अध्याय दिखाता है कि कैसे औद्योगीकरण और औपनिवेशिक नीतियों ने न केवल शहरों के भौतिक स्वरूप, बल्कि वहाँ के समाजों के जीवन को भी गहराई से बदल दिया। कलकत्ता, बॉम्बे और मद्रास जैसे महानगरों की कहानियाँ यहाँ मजदूरों, कारीगरों, व्यापारियों और प्रवासियों के संघर्षों, उनकी आशाओं और सामाजिक बदलावों के साथ जुड़ी हैं। आप समझेंगे कि कैसे इन शहरों में रहने वाले विविध समुदाय—स्थानीय निवासी, यूरोपीय अधिकारी, और दूरदराज़ के गाँवों से आए लोग—एक-दूसरे से जुड़े, टकराए, और नए सांस्कृतिक ताने-बाने बुने। शहरी नियोजन और आधुनिक सुविधाओं जैसे रेलवे, नहरें, और सार्वजनिक भवनों के विकास को इस प्रसंग में देखा गया है कि ये परिवर्तन आम लोगों के रोज़मर्रा के जीवन, उनकी गतिशीलता और सामाजिक रिश्तों को कैसे प्रभावित करते थे। साथ ही, यह अध्याय शहरी जीवन की विडंबनाओं—जैसे विषमताएँ, गरीब बस्तियों का उभार और नए वर्गीय संघर्षों—को भी उजागर करता है, जो दिखाता है कि शहर केवल ईंट-पत्थर नहीं, बल्कि लोगों की सामूहिक आकांक्षाओं और अनुभवों का जीवंत केन्द्र हैं।

Bihar Board Class 10 History Chapter 6 Solutions – शहरीकरण एवं शहरी जीवन

प्रश्न 1. सामंती व्यवस्था से हटकर किस प्रकार की शहरी व्यवस्था की प्रवृत्ति बढ़ी?

(क) प्रगतिशील प्रवृति
(ख) आक्रामक प्रवृति
(ग) रूढ़िवादी प्रवृति
(घ) शोषणकारी प्रवृत

उत्तर- (क)

प्रश्न 2. शहर को आधुनिक व्यक्ति का किस प्रकार का क्षेत्र माना जाता है ?

(क) सीमित क्षेत्र
(ख) प्रभावी क्षेत्र
(ग) विस्तृत क्षेत्र ।
(घ) सभी

उत्तर- (ख)

प्रश्न 3. स्थायी कृषि के प्रभाव से कैसा जमाव संभव हुआ?

(क) संपत्ति
(ख) ज्ञान
(ग) शांति
(घ) बहुमूल्य धातु

उत्तर- (क)

प्रश्न 4. एक प्रतियोगी एवं उद्यमी प्रवृति से प्रेरित किस प्रकार की अर्थव्यवस्था लागू की गई?

(क) जीवन-निर्वाह अर्थव्यवस्था
(ख) मृदा प्रधान अर्थव्यवस्था
(ग) शिथिल अर्थव्यवस्था
(घ) सभी

उत्तर- (ख)

प्रश्न 5. आधुनिक काल में औद्योगीकरण ने किसके स्वरूप को गहन रूप से प्रभावित किया ?

(क) ग्रामीणीकरण
(ख) शहरीकरण
(ग) कस्बा
(घ) बन्दरगाहो

उत्तर- (ख)

प्रश्न 6. जनसंख्या का घनत्व सबसे अधिक कहाँ होता है ?

(क) ग्रामा
(ख) कस्बा
(ग) नगर
(घ) महानगर

उत्तर- (घ)

प्रश्न 7. 1810 से 1880 ई. तक लंदन की आबादी 10 लाख से बढ़कर कहाँ तक पहुंची ?

(क) 20 लाख
(ख) 30 लाख
(ग) 40 लाख
(घ) 50 लाख

उत्तर- (ग)

प्रश्न 8. लंदन में अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा कब लागू हुई ?

(क) 1850
(ख) 1855
(ग) 1860
(घ) 1870

उत्तर- (घ)

प्रश्न 9. कौन-सा सामाजिक वर्ग बुद्धिजीवी वर्ग के रूप में उभरकर आया?

(क) उद्योगपति वर्ग
(ख) पूँजीपति वर्ग
(ग) श्रमिक वर्ग
(घ) मध्यम वर्ग

उत्तर- (घ)

प्रश्न 10. पूँजीपति वर्ग के द्वारा किस वर्ग का शोषण हुआ?

(क) श्रमिक वर्ग
(ख) मध्यम वर्ग
(ग) कृषक वर्ग
(घ) सभी

उत्तर- (क)


1. शहरों के विस्तार में भव्य परफोटोक”का निर्माण हुआ।
2. लंदन भारी संख्या में प्रवासिया”को आकर्षित करने में सफल हुआ।
3. शहरों में रहने वाले बाध्यताआ”से सीमित थे।
4. विकासशील”देशों में नगरों के प्रति रुझान देखा जाता है।
5. नगर प्रबंधन”के द्वारा निवास तथा आवासीय पद्धति, जन यातायात के साधन, जन स्वास्थ्य इत्यादि के उपाय किये गये।


उत्तर-

(i) मैनचेस्टर(ङ) औद्योगिक नगर
(ii) चिकित्सक(घ) मध्यम वर्ग
(iii) प्रतियोगी मुद्रा प्रधान अर्थव्यवस्था(क) नगर
(iv) बम्बई(ख) वाणिज्यिक राजधानी
(v) पेरिस(ग) बेरॉन हॉसमान

प्रश्न 1. किन तीन प्रक्रियाओं के द्वारा आधुनिक शहरों की स्थापना निर्णायक रूप से हुई?

उत्तर-आधुनिक शहरों की स्थापना की तीन प्रमुख प्रक्रियाएँ
  1. औद्योगीकरण – उद्योगों के विकास से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर बढ़े, जिससे लोग गांवों से शहरों की ओर पलायन करने लगे।
  2. औपनिवेशिक शासन – ब्रिटिश शासन ने व्यापार, प्रशासन और सैन्य जरूरतों के लिए नए शहर बसाए और पुराने शहरों का पुनर्निर्माण किया।
  3. परिवहन और बुनियादी ढांचे का विकास – रेलवे, सड़कों, बंदरगाहों और संचार व्यवस्था के विस्तार से शहरों का तीव्र विकास हुआ।

प्रश्न 2. समाज़ का वर्गीकरण ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में किस भिन्नता के आधार पर किया जाता है ?

उत्तर-समाज का वर्गीकरण ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में विभिन्न भिन्नताओं के आधार पर किया जाता है, जैसे जीवन शैली, रोजगार के साधन, जनसंख्या घनत्व, बुनियादी सुविधाएं, आर्थिक गतिविधियाँ एवं सामाजिक संरचना। ग्रामीण क्षेत्र कृषि-प्रधान होते हैं, जहाँ सामुदायिक भावना अधिक होती है, जबकि नगरीय क्षेत्र औद्योगिक, वाणिज्यिक और आधुनिक सुविधाओं से युक्त होते हैं।

प्रश्न 3. आर्थिक तथा प्रशासनिक संदर्भ में ग्रामीण तथा नगरीय बनावट के दो प्रमुख आधार क्या हैं ?

उत्तर-आर्थिक एवं प्रशासनिक संदर्भ में ग्रामीण एवं नगरीय बनावट के दो प्रमुख आधार आजीविका का स्वरूप और शासन व्यवस्था हैं। ग्रामीण क्षेत्र मुख्यतः कृषि एवं पारंपरिक उद्योगों पर आधारित होते हैं, जबकि नगरीय क्षेत्र औद्योगिक, व्यापारिक एवं सेवा क्षेत्रों पर निर्भर होते हैं। प्रशासनिक रूप से गाँवों में पंचायत व्यवस्था होती है, जबकि नगरों में स्थानीय निकाय शासन करते हैं।

प्रश्न 4. गाँव के कृषि जन्य आर्थिक क्रियाकलापों की विशेषता को दर्शायें।

उत्तर-गाँव के कृषि जन्य आर्थिक क्रियाकलाप मुख्यतः पारंपरिक, प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित और आत्मनिर्भर होते हैं। इनमें फसल उत्पादन, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, मत्स्य पालन एवं कुटीर उद्योग प्रमुख हैं। ये क्रियाकलाप स्थानीय बाजारों पर निर्भर होते हैं तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाते हैं। जलवायु व मौसमी परिवर्तनों का इन पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

प्रश्न 5. शहर किस प्रकार की क्रियाओं का केन्द्र होता है

उत्तर-शहर विविध आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक क्रियाओं का केंद्र होता है। यहाँ व्यापार, उद्योग, शिक्षा, चिकित्सा, परिवहन और मनोरंजन की आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध होती हैं। शहरों में रोजगार के अधिक अवसर होते हैं, जिससे लोग यहाँ बसते हैं। ये नवाचार, तकनीकी विकास और विविध संस्कृतियों के संगम के प्रमुख स्थल होते हैं।

प्रश्न 6. नगरीय जीवन एवं आधुनिकता एक-दूसरे से अभिन्न रूप से कैसे जुड़े हुए हैं ?

उत्तर-नगरीय जीवन और आधुनिकता एक-दूसरे के पूरक हैं क्योंकि शहर तकनीकी, औद्योगिक और बौद्धिक प्रगति के केंद्र होते हैं। यहाँ आधुनिक शिक्षा, चिकित्सा, संचार, परिवहन और डिजिटल सुविधाएँ उपलब्ध होती हैं, जो जीवन को तेज़ और सुविधाजनक बनाती हैं। नवीन विचारधाराएँ, जीवनशैली और सामाजिक परिवर्तन भी नगरीय जीवन के माध्यम से ही विकसित होते हैं।

प्रश्न 7. नगरों में विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग अल्पसंख्यक है ऐसी मान्यता क्यों बनी है?

उत्तर-नगरों में विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग को अल्पसंख्यक माना जाता है क्योंकि संपत्ति, उच्च शिक्षा, बेहतर रोजगार और प्रभावशाली संसाधनों तक सीमित लोगों की ही पहुँच होती है। अधिकांश जनसंख्या मध्यम या निम्न वर्ग से होती है, जो सामान्य सुविधाओं के लिए संघर्ष करती है। आर्थिक असमानता और संसाधनों के असमान वितरण के कारण यह धारणा बनी है।

प्रश्न 8. नागरिक अधिकारों के प्रति एक नई चेतना किस प्रकार के आंदोलन या प्रयास से बनी?

उत्तर-नागरिक अधिकारों के प्रति नई चेतना सामाजिक आंदोलन, स्वतंत्रता संग्राम, लोकतांत्रिक प्रयासों और संवैधानिक सुधारों से बनी। महात्मा गांधी के अहिंसक आंदोलन, दलित उत्थान आंदोलनों, नारी अधिकार संघर्ष और श्रमिक आंदोलनों ने लोगों को जागरूक किया। शिक्षा, मीडिया और कानूनी सुधारों ने भी नागरिक अधिकारों की समझ को मजबूत किया और समानता व स्वतंत्रता की भावना को बढ़ाया।

प्रश्न 9. व्यावसायिक पूँजीवाद ने किस प्रकार नगरों के उदभव में अपना योगदान दिया?

उत्तर-व्यावसायिक पूँजीवाद ने नगरों के उद्भव में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। व्यापार, उद्योग और बाजार केंद्रित अर्थव्यवस्था के विकास से नगरों का विस्तार हुआ। बड़े पैमाने पर उत्पादन, श्रम विभाजन और निवेश ने शहरीकरण को बढ़ावा दिया। यातायात, बैंकिंग और व्यापारिक संस्थानों की स्थापना से नगर आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र बन गए।

प्रश्न 10. शहरों के उद्भव में मध्यम वर्ग की भूमिका किस प्रकार की रही ?

उत्तर-शहरों के उद्भव में मध्यम वर्ग की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। इस वर्ग ने व्यापार, शिक्षा, प्रशासन और उद्योगों में सक्रिय भागीदारी निभाई। कुशल श्रमिक, व्यापारी, शिक्षक, डॉक्टर और अन्य पेशेवरों के रूप में उन्होंने आर्थिक विकास को गति दी। उनकी उपभोक्ता संस्कृति, नवाचार और सामाजिक सुधारों ने शहरी जीवन को समृद्ध बनाया और आधुनिकता को बढ़ावा दिया।

प्रश्न 11. श्रमिक वर्ग का आगमन शहरों में किन परिस्थितियों के अन्तर्गत हुआ?

उत्तर-शहरों में श्रमिक वर्ग का आगमन ग्रामीण बेरोजगारी, कृषि पर निर्भरता की कठिनाइयों और बेहतर जीवन की तलाश जैसी परिस्थितियों में हुआ। औद्योगिकीकरण और कारखानों की स्थापना ने रोजगार के नए अवसर पैदा किए, जिससे ग्रामीण श्रमिक शहरों की ओर आकर्षित हुए। आर्थिक असमानता के बावजूद, श्रमिक वर्ग शहरी विकास और औद्योगिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देता रहा।

प्रश्न 12. शहरों ने किन नई समस्याओं को जन्म दिया?

उत्तर-शहरों ने जनसंख्या वृद्धि, आवास संकट, बेरोजगारी, प्रदूषण और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याओं को जन्म दिया। सामाजिक असमानता, झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्रों का विस्तार, जल संकट और बढ़ते अपराध भी शहरीकरण के दुष्प्रभाव हैं। मानसिक तनाव और पारिवारिक विघटन जैसी समस्याएँ भी शहरों में अधिक देखी जाती हैं, जिससे जीवनशैली पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।


प्रश्न 1. शहरों क विकास की पृष्ठभूमि एवं उसकी प्रक्रिया पर प्रकाश डालें।

उत्तर-शहरों के विकास की पृष्ठभूमि सभ्यता के प्रारंभिक काल से जुड़ी हुई है, जब मानव स्थायी बस्तियाँ बसाने लगा। प्राचीन काल में व्यापार, प्रशासन और सांस्कृतिक केंद्रों के रूप में नगरों की स्थापना हुई। औद्योगिक क्रांति ने इस प्रक्रिया को और तेज कर दिया, जिससे नगरों का विस्तार हुआ।

शहरीकरण की प्रक्रिया कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था से औद्योगिक और व्यापारिक अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने से शुरू हुई। व्यापार, उद्योग, शिक्षा, परिवहन और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार ने नगरों के विकास को बढ़ावा दिया। आधुनिक तकनीक, संचार और बुनियादी ढांचे के विकास से शहरों का स्वरूप बदला।

हालाँकि, शहरीकरण के साथ-साथ अनेक सामाजिक और पर्यावरणीय समस्याएँ भी उत्पन्न हुईं, जैसे जनसंख्या वृद्धि, प्रदूषण, आवास संकट और असमानता। सतत विकास और नियोजित शहरीकरण से ही इन चुनौतियों का समाधान संभव है।

प्रश्न 2. ग्रामीण तथा नगरीय जीवन के बीच की भिन्नता को स्पष्ट करें।

उत्तर-ग्रामीण और नगरीय जीवन के बीच कई सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक भिन्नताएँ पाई जाती हैं।

1. आजीविका और अर्थव्यवस्था:
ग्रामीण जीवन मुख्य रूप से कृषि, पशुपालन और कुटीर उद्योगों पर आधारित होता है, जबकि नगरीय जीवन उद्योग, व्यापार, सेवा क्षेत्र और तकनीकी व्यवसायों पर निर्भर रहता है।

2. जनसंख्या और संरचना:
गाँवों में जनसंख्या घनत्व कम होता है, और प्राकृतिक वातावरण अधिक होता है। इसके विपरीत, शहरों में जनसंख्या घनत्व अधिक होता है, जिससे अधिक भीड़ और व्यस्त जीवनशैली देखी जाती है।

3. जीवनशैली और सुविधाएँ:
गाँवों में सरल, शांत और सामुदायिक जीवन होता है, जबकि शहरों में प्रतियोगी, तेज और व्यक्तिगत जीवनशैली हावी होती है। शहरों में शिक्षा, चिकित्सा, परिवहन और तकनीकी सुविधाएँ अधिक विकसित होती हैं।

4. सामाजिक संरचना:
गाँवों में सामाजिक संबंध मजबूत होते हैं, जबकि शहरों में व्यक्ति अधिक आत्मनिर्भर और व्यक्तिगत होता है।

दोनों जीवन शैलियों के अपने लाभ और चुनौतियाँ हैं, जो विकास और आधुनिकता के साथ बदलती रहती हैं।

प्रश्न 3. शहरी जीवन में किस प्रकार के सामाजिक बदलाए आए।

उत्तर-शहरीकरण ने समाज में व्यापक बदलाव लाए हैं, जिससे जीवनशैली, परिवार संरचना, रोजगार और सामाजिक संबंधों में परिवर्तन हुआ है।

1. परिवार संरचना में बदलाव:
पारंपरिक संयुक्त परिवार व्यवस्था कमजोर हुई और एकल परिवारों की संख्या बढ़ी। नौकरी और शिक्षा के कारण लोग अपने परिवारों से दूर रहने लगे।

2. जीवनशैली में परिवर्तन:
शहरों में जीवन तेज़ गति वाला और प्रतिस्पर्धात्मक हो गया है। तकनीकी विकास, उपभोक्तावाद और डिजिटल सुविधाओं ने लोगों की दिनचर्या को बदला है।

3. सामाजिक संबंधों में कमी:
गाँवों की तुलना में शहरों में पड़ोसियों के बीच भावनात्मक जुड़ाव कम हो गया है। व्यक्तिगत स्वतंत्रता बढ़ी लेकिन सामाजिक एकता कमजोर हुई।

4. महिलाओं की स्थिति में सुधार:
शिक्षा और रोजगार के बढ़ते अवसरों के कारण महिलाओं की भूमिका मजबूत हुई, जिससे समाज में लैंगिक समानता को बढ़ावा मिला।

5. सांस्कृतिक विविधता:
शहरों में विभिन्न जाति, धर्म और संस्कृतियों के लोग एक साथ रहते हैं, जिससे सामाजिक समरसता बढ़ी लेकिन पारंपरिक मूल्यों में कमी आई।

शहरी जीवन में ये बदलाव आधुनिकता और विकास के साथ निरंतर जारी हैं।

प्रश्न 4. शहरीकरण की प्रक्रिया में व्यवसायी वर्ग, मध्यम वर्ग मजदूर वर्ग की भूमिका की चर्चा करें।

उत्तर-शहरीकरण की प्रक्रिया में समाज के विभिन्न वर्गों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। व्यवसायी वर्ग, मध्यम वर्ग और मजदूर वर्ग, तीनों ही शहरों के विकास और विस्तार में योगदान देते हैं।

1. व्यवसायी वर्ग की भूमिका:
व्यवसायी वर्ग शहरों के आर्थिक विकास का प्रमुख आधार है। इस वर्ग ने उद्योग, व्यापार, बैंकिंग और परिवहन क्षेत्रों में निवेश किया, जिससे रोज़गार के अवसर बढ़े और शहरीकरण को गति मिली। बड़े उद्योगों और व्यावसायिक संस्थानों ने नगरों को व्यापारिक केंद्रों के रूप में स्थापित किया।

2. मध्यम वर्ग की भूमिका:
मध्यम वर्ग शिक्षकों, डॉक्टरों, इंजीनियरों, सरकारी कर्मचारियों और छोटे व्यवसायियों से मिलकर बना होता है। यह वर्ग शिक्षा, नवाचार और प्रशासन में योगदान देकर शहरी जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाता है। इसके उपभोक्ता व्यवहार से बाजारों का विकास होता है।

3. मजदूर वर्ग की भूमिका:
मजदूर वर्ग शहरों में निर्माण, कारखानों और सेवाओं के क्षेत्र में कार्य करता है। इनके परिश्रम से शहरों में बुनियादी ढांचे, उद्योग और परिवहन प्रणाली का विस्तार हुआ। हालाँकि, यह वर्ग अक्सर असुरक्षित रोज़गार और कठिन परिस्थितियों में जीवनयापन करता है।

इन तीनों वर्गों के सामूहिक प्रयासों से ही शहरीकरण संभव हुआ और नगरों का विकास हुआ।

प्रश्न 5. एक औपनिवेशिक शहर के रूप में बम्बई शहर के विकास की समीक्षा करें।

उत्तर-बंबई (अब मुंबई) का विकास एक प्रमुख औपनिवेशिक शहर के रूप में हुआ। 17वीं शताब्दी में यह सात द्वीपों का एक समूह था, जिसे 1661 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने पुर्तगालियों से प्राप्त किया। इसके बाद इसे व्यापार और प्रशासनिक केंद्र के रूप में विकसित किया गया।

1. व्यापार और उद्योग:
बंबई ब्रिटिश शासन में एक महत्त्वपूर्ण बंदरगाह बना, जहाँ कपास, मसाले और अफीम का व्यापार तेजी से बढ़ा। 19वीं शताब्दी में कपड़ा मिलों की स्थापना से यह औद्योगिक केंद्र बन गया, जिससे बड़ी संख्या में मजदूर वर्ग यहाँ आकर बसने लगा।

2. बुनियादी ढांचे का विकास:
ब्रिटिश प्रशासन ने रेलवे, सड़कें और बंदरगाह विकसित किए, जिससे व्यापारिक गतिविधियाँ बढ़ीं। यहाँ बंबई हाई कोर्ट, विक्टोरिया टर्मिनस और अन्य औपनिवेशिक इमारतों का निर्माण हुआ।

3. सामाजिक परिवर्तन:
औद्योगिकीकरण के कारण श्रमिक वर्ग की बस्तियाँ विकसित हुईं, लेकिन गरीबी, जनसंख्या वृद्धि और झुग्गी-झोपड़ी की समस्या भी बढ़ी। बंबई स्वतंत्रता संग्राम और श्रमिक आंदोलनों का भी केंद्र बना।

औपनिवेशिक काल में बंबई आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक रूप से एक महत्त्वपूर्ण शहरी केंद्र के रूप में उभरा, जो आज भी भारत की आर्थिक राजधानी है।


Chapter Solutions

Chapter 1 Solutionsयूरोप में राष्ट्रवाद
Chapter 2 Solutionsसमाजवाद एवं साम्यवाद
Chapter 3 Solutionsहिन्द-चीन में राष्ट्रवादी आंदोलन
Chapter 4 Solutionsभारत में राष्ट्रवाद
Chapter 5 Solutionsअर्थव्यवस्था और आजीविका
Chapter 6 Solutionsशहरीकरण एवं शहरी जीवन
Chapter 7 Solutionsव्यापार और भूमंडलीकरण
Chapter 8 Solutionsप्रेस एवं सस्कृतिक राष्ट्रवाद

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