Bihar Board Class 10 History Chapter 5 Solutions – अर्थव्यवस्था और आजीविका

Bihar Board Class 10 History Chapter 5 Solutions – अर्थव्यवस्था और आजीविका

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बिहार बोर्ड कक्षा 10 के इतिहास के पाँचवें अध्याय “अर्थव्यवस्था और आजीविका में आधुनिक भारत के आर्थिक परिवर्तनों को मानवीय दृष्टिकोण से समझाया गया है। यह पाठ दिखाता है कि कैसे औपनिवेशिक नीतियों ने भारत के पारंपरिक जीवन-ताने-बाने को तोड़ा। किसानों की उपजाऊ भूमि पर नील और कपास की जबरन खेती ने न केवल भूखमरी को जन्म दिया, बल्कि सदियों के कृषि-ज्ञान को भी नष्ट किया। हस्तशिल्प उद्योग, जो सांस्कृतिक अस्मिता और रोजगार का आधार थे, मशीनों के सामने बौने पड़ गए। लाखों कारीगर बेरोजगार हुए, और उनका सृजनात्मक गौरव टूट गया।

Bihar Board Class 10 History Chapter 5 Solutions – अर्थव्यवस्था और आजीविका

प्रश्न 1. स्पिनिंग जेनी का आविष्कार कब हुआ ?

(क) 1769
(ख) 1770
(ग) 1773
(घ) 1775

उत्तर- (ख) 

प्रश्न 2. सेफ्टी लैम्प का आविष्कार किसने किया?

(क) जेम्स हारग्रीब्ज
(ख) जॉन के
(ग) क्राम्पटन
(घ) हम्फ्री डेवी.

उत्तर- (घ)

प्रश्न 3. बम्बई में सर्वप्रथम सूती कपड़े के मिलों की स्थापना कब हुई ?

(क) 1851
(ख) 1885
(ग). 1907
(घ) 1914

उत्तर- (क)

प्रश्न 4. 1917 ई० में भारत में पहली जूट मिल किस शहर में स्थापित हुआ?

(क) कलकत्ता
(ख) दिल्ली
(ग) बम्बई
(घ) पटना

उत्तर- (क)

प्रश्न 5. भारत में कोयला उद्योग का प्रारम्भ कब हुआ?

(क) 1907
(ख) 1914
(ग) 1916
(घ) 1919

उत्तर- (ख)

प्रश्न 6. जमशेदजी टाटा ने टाटा आयरन एण्ड स्टील कम्पनी की स्थापना कब की?

(क) 1854
(ख) 1907
(ग) 1915
(घ) 1919

उत्तर- (ख) 

प्रश्न 7. वैज्ञानिक समाजवाद का प्रतिपादन किसने किया?

(क) राबर्ट ओवन
(ख) लुई ब्लांक
(ग) कार्ल मार्क्स
(घ) लाला लाजपत राय

उत्तर- (ग)

प्रश्न 8. इंगलैंड में सभी स्त्री एवं पुरुषों को वयस्क मताधिकार कब प्राप्त हुआ?

(क) 1838
(ख) 1881
(ग) 1885
(घ) 1932

उत्तर- (ग)

प्रश्न 9. ‘अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन काँग्रेस’ की स्थापना कब हुई?

(क) 1848
(ख) 1881
(ग) 1885
(घ) 1920

उत्तर- (घ)

प्रश्न 10. भारत के लिए पहला फैक्ट्री एक्ट कब पारित हुआ?

(क) 1838
(ख) 1858
(ग) 1881
(घ) 1911

उत्तर- (ग)

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1. सन् 1838 ई. में लंदन में चार्टिस्ट आन्दोलन की शुरूआत हुई।
2. सन् 1926 में मजदूर संघ अधिनियम पारित हुआ।
3. न्यूनतम मजदूरी कानून, सन् 1948 ई. में पारित हुआ।
4. अन्तर्राष्ट्रीय श्रमिक संघ की स्थापना 1920 ई. में हुई।
5. प्रथम फैक्ट्री एक्ट में महिलाओं एवं बच्चों की आयु एवं काम का घंटा को निश्चित किया गया।

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उत्तर-

(i) स्पिनिंग जेनी(ङ) जेम्स हारग्रीब्ज
(ii) फ्लाइंग शटल(घ) जॉन के
(iii) पावर लूम(ख) एडमण्ड कार्टराईट
(iv) वाष्प इंजन(ग) जेम्सवाट
(v) स्पिनिंग म्यूल(क) सेम्यूल क्राम्पटन

प्रश्न 1. फैक्ट्री प्रणाली के विकास के किन्हीं दो कारणों को बतायें।

  1. उद्योगों में तकनीकी प्रगति – नई मशीनों के आविष्कार से उत्पादन तेज़ और सस्ता हुआ, जिससे फैक्ट्री प्रणाली विकसित हुई।
  2. बढ़ती बाज़ार मांग – वैश्विक व्यापार के विस्तार और उपभोक्ता मांग में वृद्धि ने बड़े पैमाने पर उत्पादन की आवश्यकता बढ़ाई, जिससे फैक्ट्रियों का विकास हुआ।

प्रश्न 2. बुर्जुआ वर्ग की उत्पति कैसे हुई ?

उत्तर-बुर्जुआ वर्ग की उत्पत्ति मध्यकालीन यूरोप में सामंती व्यवस्था के विरुद्ध व्यापारियों, शिल्पियों और बुद्धिजीवियों के संघर्ष से हुई, जिन्होंने आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक प्रभाव के लिए नई मानवीय आकांक्षाओं को जन्म दिया।

प्रश्न 3. अठारहवीं शताब्दी में भारत के मुख्य उद्योग कौन-कौन से थे?

उत्तर-अठारहवीं सदी में भारत के मुख्य उद्योग – सूती वस्त्र, रेशम बुनाई, हस्तशिल्प, धातु कार्य, मसाला व्यापार और नमक उत्पादन और हस्तनिर्मित कागज। ये उद्योग स्थानीय समुदायों की सांस्कृतिक पहचान और कलात्मक कौशल को जीवित रखते थे।

प्रश्न 4. निरुद्योगीकरण से आपका क्या तात्पर्य है ?

उत्तर-निरुद्योगीकरण उस प्रक्रिया को कहते हैं जिसमें परंपरागत उद्योगों का पतन हो जाता है। औपनिवेशिक शासन में भारतीय हस्तशिल्प और कुटीर उद्योग नष्ट हो गए, जिससे बेरोजगारी बढ़ी।

प्रश्न 5. औद्योगिक आयोग की नियुक्ति कब हुई ? इसके क्या उद्देश्य थे?

उत्तर-

नियुक्ति: 1916 में ब्रिटिश सरकार ने भारतीय औद्योगिक आयोग की स्थापना की।

उद्देश्य: भारतीय उद्योगों की स्थिति का अध्ययन करना, आर्थिक विकास की संभावनाएं तलाशना और ब्रिटिश औपनिवेशिक नीतियों के प्रभाव का विश्लेषण करना।

प्रश्न 1. औद्योगीकरण से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर-औद्योगीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें किसी देश या समाज में बड़े पैमाने पर उद्योगों की स्थापना और मशीनों द्वारा उत्पादन को बढ़ावा दिया जाता है। इससे पारंपरिक कृषि-प्रधान अर्थव्यवस्था से उद्योग-प्रधान अर्थव्यवस्था में परिवर्तन होता है। औद्योगीकरण के कारण रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं, शहरीकरण बढ़ता है और आर्थिक विकास को गति मिलती है।

प्रश्न 2. औद्योगीकरण ने मजदूरों की आजीविका को किस तरह प्रभावित किया ?

उत्तर-औद्योगीकरण ने मजदूरों की आजीविका को गहराई से प्रभावित किया। एक ओर, इससे नए रोजगार के अवसर बढ़े, लेकिन दूसरी ओर, मजदूरों का शोषण भी हुआ। लंबी कार्यावधि, कम वेतन और असुरक्षित कार्यस्थल उनकी बड़ी समस्याएँ बनीं। पारंपरिक कारीगरों और हस्तशिल्पियों का रोजगार समाप्त हो गया, जिससे कई लोग बेरोजगार हो गए और शहरी गरीबी बढ़ी।

प्रश्न 3. स्लम पद्धति की शुरुआत कैसे हुई?

उत्तर-स्लम पद्धति की शुरुआत औद्योगीकरण और शहरीकरण के बढ़ते प्रभाव से हुई। जब ग्रामीण लोग रोजगार की तलाश में शहरों की ओर आने लगे, तब उन्हें सस्ते और अस्वास्थ्यकर इलाकों में बसना पड़ा। फैक्ट्रियों के आसपास अनियोजित रूप से बस्तियाँ बनीं, जहाँ बुनियादी सुविधाओं का अभाव था। गरीबी, अधिक जनसंख्या और उचित आवास की कमी ने स्लम संस्कृति को जन्म दिया।

प्रश्न 4. न्यूनतम मजदूरी कानून कब पारित हुआ और इसके क्या उद्देश्य थे?

उत्तर-न्यूनतम मजदूरी कानून 1948 में पारित हुआ। इसका मुख्य उद्देश्य श्रमिकों को मानवीय गरिमा के साथ जीवन जीने योग्य आय सुनिश्चित करना था, ताकि उनका आर्थिक शोषण रोका जा सके। यह कानून समाज में वेतन की असमानता को कम करने, श्रमिक अधिकारों की रक्षा करने और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया था।

प्रश्न 5. कोयला एवं लौह उद्योग ने औद्योगीकरण को गति प्रदान की। कैसे?

कोयला और लौह उद्योग ने औद्योगीकरण को गति दी क्योंकि कोयले ने भाप इंजनों को शक्ति दी, जिससे मशीनें और कारखाने चले। लौह ने मजबूत मशीनरी, रेलवे और पुलों का निर्माण संभव बनाया। इन दोनों ने उत्पादन क्षमता बढ़ाई, परिवहन सुगम किया और शहरीकरण को प्रोत्साहन दिया, जिससे औद्योगिक क्रांति ने व्यापक स्तर पर गति पकड़ी और आर्थिक विकास को बल मिला।

प्रश्न 1. औद्योगीकरण के कारणों का उल्लेख करें।

उत्तर-औद्योगीकरण के कारण

औद्योगीकरण किसी भी देश की प्रगति और आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण चरण होता है। इसके कई कारण हैं, जिनमें प्रमुख निम्नलिखित हैं:

  1. जनसंख्या वृद्धि और मांग – बढ़ती जनसंख्या के साथ वस्तुओं और सेवाओं की मांग भी बढ़ी, जिससे उत्पादन को अधिक प्रभावी और तीव्र बनाने की आवश्यकता पड़ी।
  2. वैज्ञानिक एवं तकनीकी प्रगति – नई मशीनों और तकनीकों के विकास ने उत्पादन को आसान और कुशल बना दिया, जिससे औद्योगीकरण को बढ़ावा मिला।
  3. कच्चे माल की उपलब्धता – प्राकृतिक संसाधनों की भरपूर उपलब्धता, जैसे लोहा, कोयला और पेट्रोलियम, ने उद्योगों को पनपने में सहायता की।
  4. नवाचार और पूंजी निवेश – उद्योगपतियों और सरकार द्वारा नए विचारों में निवेश और बुनियादी ढांचे के निर्माण ने औद्योगीकरण को गति दी।
  5. श्रम शक्ति और शहरीकरण – ग्रामीण क्षेत्रों से लोगों का शहरों की ओर पलायन हुआ, जिससे उद्योगों को श्रमिक मिलने लगे और शहरों का विकास हुआ।
  6. उपभोक्तावाद और बाजार विस्तार – औद्योगीकरण ने बड़े पैमाने पर उत्पादन को बढ़ावा दिया, जिससे उपभोक्ताओं के लिए नए बाजार विकसित हुए।

इन कारणों से औद्योगीकरण ने आधुनिक समाज को आर्थिक मजबूती और नई संभावनाओं की दिशा में आगे बढ़ाया।

प्रश्न 2. औद्योगीकरण के परिणामस्वरूप होनेवाले परिवर्तनों पर प्रकाश डालें।

उत्तर-औद्योगीकरण के परिणामस्वरूप होने वाले परिवर्तन

औद्योगीकरण ने समाज, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण पर गहरा प्रभाव डाला है। इसके कारण विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिले, जिनमें प्रमुख निम्नलिखित हैं:

  1. आर्थिक प्रगति – बड़े पैमाने पर उत्पादन और उद्योगों के विकास से देशों की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ हुई, जिससे रोजगार के अवसर बढ़े।
  2. शहरीकरण में वृद्धि – लोग बेहतर जीवन और रोजगार की तलाश में गांवों से शहरों की ओर पलायन करने लगे, जिससे नए शहर विकसित हुए।
  3. तकनीकी विकास – मशीनों और वैज्ञानिक खोजों में तेजी आई, जिससे उत्पादन की गति और गुणवत्ता में सुधार हुआ।
  4. सामाजिक संरचना में परिवर्तन – संयुक्त परिवार प्रणाली में कमी आई और व्यक्तिवाद को बढ़ावा मिला।
  5. पर्यावरणीय प्रभाव – औद्योगीकरण के कारण वायु, जल और भूमि प्रदूषण बढ़ा, जिससे प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन हुआ।
  6. श्रमिक वर्ग का उत्थान – मजदूर संघों का गठन हुआ और श्रमिक अधिकारों की मांग बढ़ी, जिससे कार्यस्थलों पर सुधार आया।
  7. नए उपभोक्ता बाजारों का विस्तार – बड़े पैमाने पर उत्पादन के कारण सस्ती और अधिक वस्तुएं उपलब्ध हुईं, जिससे उपभोक्तावाद को बढ़ावा मिला।

इन परिवर्तनों ने आधुनिक समाज को गहराई से प्रभावित किया और एक नई औद्योगिक संस्कृति को जन्म दिया।

प्रश्न 3. उपनिवेशवाद से आप क्या समझते हैं ? औद्योगीकरण ने उपनिवेशवाद को जन्म दिया। कैसे?

उत्तर-उपनिवेशवाद का अर्थ है जब कोई शक्तिशाली देश किसी कमजोर देश या क्षेत्र पर राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से नियंत्रण स्थापित कर लेता है। औद्योगीकरण ने उपनिवेशवाद को बढ़ावा दिया क्योंकि औद्योगिक राष्ट्रों को अपने कारखानों के लिए सस्ते कच्चे माल, श्रम और नए बाजारों की आवश्यकता थी।

  1. कच्चे माल की आवश्यकता – उद्योगों के विकास के लिए कोयला, लोहा, कपास, रबर आदि की मांग बढ़ी, जिसे औद्योगिक देशों ने उपनिवेशों से प्राप्त किया।
  2. नए बाजारों की खोज – बड़े पैमाने पर उत्पादन के बाद वस्तुओं को बेचने के लिए नए बाजारों की जरूरत पड़ी, जिससे उपनिवेश स्थापित किए गए।
  3. सस्ते श्रम का दोहन – उपनिवेशों में सस्ते श्रमिकों से कठिन परिश्रम करवाया गया, जिससे औद्योगिक देशों का लाभ बढ़ा।
  4. आर्थिक प्रभुत्व – औद्योगिक देशों ने अपने उपनिवेशों की अर्थव्यवस्था को इस प्रकार नियंत्रित किया कि वे केवल कच्चे माल के आपूर्तिकर्ता और तैयार वस्तुओं के खरीदार बनकर रह गए।
  5. सैन्य और राजनीतिक नियंत्रण – औद्योगिक देशों ने अपने व्यापार और संसाधनों की सुरक्षा के लिए उपनिवेशों पर सैन्य शक्ति का प्रयोग किया।

इस प्रकार, औद्योगीकरण ने शक्तिशाली देशों को उपनिवेशवाद की ओर प्रेरित किया और दुनिया के कई हिस्सों को आर्थिक और राजनीतिक रूप से नियंत्रित किया।

प्रश्न 4. कुटीर उद्योग के महत्व एवं उसकी उपयोगिता पर प्रकाश डालें।

उत्तर-कुटीर उद्योग वे लघु उद्योग होते हैं जो आमतौर पर घरों में या छोटे स्तर पर संचालित किए जाते हैं। ये उद्योग पारंपरिक हस्तकला, वस्त्र, मिट्टी के बर्तन, लकड़ी के सामान, बांस के उत्पाद आदि से जुड़े होते हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

महत्व

  1. रोजगार सृजन – ये उद्योग गांवों और छोटे कस्बों में लोगों को रोजगार उपलब्ध कराते हैं, जिससे पलायन की समस्या कम होती है।
  2. स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा – ये उद्योग आत्मनिर्भरता को बढ़ाते हैं और स्थानीय संसाधनों का सदुपयोग करते हैं।
  3. संस्कृति और परंपरा का संरक्षण – हस्तशिल्प, बुनाई, कढ़ाई जैसे उद्योग सांस्कृतिक धरोहर को बनाए रखने में मदद करते हैं।
  4. महिलाओं के सशक्तिकरण में योगदान – कई कुटीर उद्योगों में महिलाएं प्रमुख भूमिका निभाती हैं, जिससे उन्हें आत्मनिर्भरता मिलती है।

उपयोगिता

  1. किफायती और टिकाऊ उत्पाद – कुटीर उद्योगों में बने उत्पाद पर्यावरण के अनुकूल और लंबे समय तक चलने वाले होते हैं।
  2. आर्थिक समृद्धि – ये छोटे स्तर पर होते हुए भी स्थानीय व्यापार और विदेशी मुद्रा अर्जित करने में सहायक होते हैं।
  3. कृषि पर निर्भरता कम करना – ये उद्योग ग्रामीण क्षेत्रों में वैकल्पिक रोजगार प्रदान कर कृषि पर निर्भरता को कम करते हैं।

इस प्रकार, कुटीर उद्योग आत्मनिर्भरता, रोजगार और सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने में अहम भूमिका निभाते हैं।

प्रश्न 5. औद्योगीकरण ने सिर्फ आर्थिक ढाँचे को ही प्रभावित नहीं किया बल्कि राजनैतिक परिवर्तन का भी मार्ग प्रशस्त किया। कैसे?

उत्तर-औद्योगीकरण ने केवल आर्थिक ढांचे को ही नहीं बदला, बल्कि इससे राजनीतिक व्यवस्था में भी गहरे बदलाव आए। जैसे-जैसे उद्योगों का विकास हुआ, वैसे-वैसे शासन की नीतियां, प्रशासनिक व्यवस्थाएं और राजनीतिक शक्तियों का संतुलन भी प्रभावित हुआ।

राजनीतिक परिवर्तन के प्रमुख कारण

  1. लोकतांत्रिक विचारों का प्रसार – औद्योगीकरण के कारण शिक्षा और जागरूकता बढ़ी, जिससे लोकतंत्र, स्वतंत्रता और समानता के विचार मजबूत हुए।
  2. मजदूर वर्ग का उदय – श्रमिकों के अधिकारों और बेहतर कार्य स्थितियों की मांग ने ट्रेड यूनियनों और श्रमिक आंदोलनों को जन्म दिया, जिससे सरकारों को श्रम कानून बनाने पड़े।
  3. राष्ट्रीयता और स्वतंत्रता आंदोलनों को बढ़ावा – उपनिवेशों में औद्योगिक देशों के शोषण के खिलाफ राष्ट्रीय आंदोलनों ने गति पकड़ी, जिससे स्वतंत्रता संघर्ष तेज हुआ।
  4. सामाजिक और आर्थिक नीतियों में बदलाव – सरकारों को पूंजीवाद और समाजवाद जैसे आर्थिक विचारों पर ध्यान देना पड़ा, जिससे नीतिगत बदलाव हुए।
  5. युद्ध और सैन्य शक्ति का प्रभाव – औद्योगीकरण ने हथियारों के उत्पादन को बढ़ाया, जिससे कई देशों ने सैन्य विस्तार किया और वैश्विक शक्ति संतुलन बदला।

इस प्रकार, औद्योगीकरण ने न केवल आर्थिक बल्कि राजनीतिक ढांचे को भी प्रभावित किया और आधुनिक राष्ट्र-राज्यों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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